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सिंधु घाटी सभ्यता के पतन के कारण

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सिंधु घाटी सभ्यता के पतन के कारण

पृष्ठभूमि :- हड़प्पा सभ्यता कांस्य युगीन सभ्यता थी, यह एक नगरीय सभ्यता थी जिस के संदर्भ में कुछ इतिहासकारों का यह मानना है कि यह मेसोपोटामिया सभ्यता का ही एक विस्तार है, हालांकि यह मत स्वीकार्य नहीं है । इस सभ्यता का विस्तार भारत के उत्तर में मांडा, दक्षिण में दैमाबाद, पूर्व में आलमगीरपुर तथा पश्चिम में सुतकागेंडोर तक था।

पतन के कारण

सिंधु घाटी सभ्यता प्राचीन सभ्यता के रूप में जानी जाने वाली एक विशाल सभ्यता थी ।जिस के पतन के पीछे कोई एक कारण उत्तरदायी नहीं हो सकता बल्कि इस सभ्यता के पतन के अनेक कारण अलग-अलग इतिहासकारों ने अलग-अलग तरीकों से बताएं है।आइए हम जानते हैं किस इतिहासकार ने क्या कारण बताया
प्रशासनिक शिथिलता – जॉन मार्शल
(जॉन मार्शल द्वारा प्रशासनिक शिथिलता के अलावा विनाश के लिए भूकंप भी उत्तरदायी कारण बताया है)
जलवायु परिवर्तन -आरेल स्टाइन, अमलानंद
बाढ़ से नष्ट हुई -जॉन मार्शल (मोहनजोदड़ो ),मैके(चन्हूदड़ों), एस आर राव (लोथल)
आर्यों का आक्रमण– गार्डन चाइल्ड , व्हीलर ,मैके ,पिग्गट
भू तात्विक परिवर्तन – आर एल राइक्स, जॉर्ज डेल्स
विदेशी व्यापार में गतिरोध– डब्ल्यू एफ अलब्राइट
महामारी – यू के आर केनेडी

अनेक इतिहासकारों के मतों के बाद रोमिला थापर ने अपना क्रमिक पतन सिद्धांत दिया जो निम्न प्रकार है

जनसंख्या वृद्धि भूमि की आवश्यकता बढ़ना पेड़ों का कटाव मृदा अपरदन नदी का उथलापन बाढ़ की स्थिति कृषि का चौपट होना उद्योग का प्रभावित होना व्यापार नष्ट होना आपसी संघर्ष प्रशासनिक शिथिलता पलायन आर्यों का आगमन सिंधु सभ्यता का पतन

  • इतिहासकारों के मत जानने के बाद यह स्पष्ट है कि इस सभ्यता के पतन के पीछे कोई एक कारण नहीं है यह एक महान सभ्यता थी जो इतिहास के पन्नों में जो कहीं खो गई। इसके पतन का अब तक कोई भी स्पष्ट कारण नहीं बताया गया है। (ऋग्वेद में हरयूपिया शब्द का उल्लेख है उसे सिंधु घाटी सभ्यता ही माना गया है)

सर्वाधिक स्वीकार्य मत

  • हड़प्पा सभ्यता के पतन का तात्पर्य है, नागरिक चरण का पतन और सभ्यता पुनःअपने ग्रामीण चरण में प्रवेश कर गयी।
  • सभ्यता के पतन के संदर्भ में आर्य आक्रमण का सिद्धांत प्रमाणिक नहीं है, क्योंकि इसके पक्ष में पुरातात्विक साक्ष्य उपलब्ध नहीं है।
  • पतन के संदर्भ में पारिस्थितिकीय संतुलन सर्वाधिक प्रमुख कारण है, वस्तुतः इसके तहत बाढ़ भूकंप नदियों के मार्ग में परिवर्तन आया, जिससे कृषि अधिशेष में कमी आयी जिससे व्यापार बाधित हुआ और नगरों का पतन हुआ इसलिए हड़प्पा संस्कृति अन्य तत्व ग्रामीण संस्कृतियों में दिखाई पड़ते हैं, जिन्हें उत्तर हड़प्पा संस्कृति के नाम से जाना जाता है।

वर्तमान संदर्भ में अगर देखें तो यह समझना आवश्यक होगा कि सतत और समावेशी विकास की संकल्पना को संपूर्ण विश्व द्वारा अपनाया जाना अत्यंत आवश्यक है, जैसे की हम देख रहे हैं पृथ्वी का औसत तापमान निरंतर बढ़ रहा है पारिस्थितिकी पद चिन्ह के अनुपात में निरंतर कमी आ रही है फसल चक्र, मौसम मैं निरंतर परिवर्तन हो रहा है, अतः इस वर्तमान सभ्यता को भी यदि अपने अस्तित्व को बनाए रखना है, तो यह आवश्यक है कि पारिस्थितिकी संतुलन बनाया रखा जावे साथ ही संसाधनों का अनियंत्रित दोहन न किया जावे अन्यथा निकट भविष्य में वर्तमान समाज के लिए व्यापक चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है, महामारी का प्रकोप और उसकी तीव्रता भी कहीं ना कहीं पारिस्थितिकी असंतुलन का परिणाम है। यह समझना होगा कि सिंधु घाटी जैसी महान सभ्यता का पतन अगर हुआ है तो इस सभ्यता को उससे सीख कर अपने क्रियाकलाप को नियंत्रित करना चाहिए।

This article is written by Supriya Kudraya
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