Loading...

सभ्यता और संस्कृति की अवधारणा

Follow Us @ Telegram

सभ्यता और संस्कृति की अवधारणा

Mppsc Mains GS Paper 2 Part B Unit 4

सामान्यतः सभ्यता और संस्कृति को समानार्थी मान लेते हैं, जो कि पूर्ण रूप से सही नहीं है क्योंकि सभ्यता में भौतिक पक्ष प्रमुख होता है लेकिन संस्कृति में व्यापारिक पक्ष की प्रधानता होती है।

इसलिए ही मैंकाईवर  द्वारा सभ्यता को भौतिकवादी विकास माना है, तथा संस्कृति को सभ्यता का वाहक कहा है।

 सभ्यता

  •  सभ्यता शब्द की उत्पत्ति लैटिन भाषा के शब्द civitas  या civis  से हुई है जिसका अर्थ होता है नगर एवं  नगरवासी। अंग्रेजी के Civilized   शब्द का समानार्थी है।

परिभाषा –  सभ्यता शब्द को विभिन्न समाज शास्त्रियों द्वारा प्रथक प्रथक ढंग से परिभाषित किया गया है-

  टायलर के अनुसार –

सभी मानव जाति की व्यवस्था है जिसमें उच्च श्रेणी के वैयक्तिक और सामाजिक संगठन पाए जाते हैं।

 मैकाइवर एवं पेज के अनुसार-

सभ्यता में वे  भौतिक तत्व शामिल होते हैं जो हमारी आवश्यकताओं की पूर्ति करते हैं और जो हमारे उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए साधन के रूप में प्रयुक्त होते हैं।

मिलिन एवं गिलिन  के अनुसार –

संस्कृति का जो अधिक जटिल एवं विकसित रूप है वही सभ्यता है।

सभ्यता की प्रमुख विशेषताएं :-

  • सभ्यता का हस्तांतरण और प्रसार सरल है।
  •  सभ्यता में शीघ्र परिवर्तन होता है।
  •  संस्कृति का उच्चतम विकास सभ्यता है।
  •  मानव निर्मित भौतिक वस्तुएं सभ्यता का ही रूप है।
  •  सभ्यता मूर्त होती है साथ ही उसमें प्रगतिशील स्वरूप होता है।
  •  सभ्यता का मूल्यांकन सरल होता है।
  •  सभ्यता एक प्रकार का साधन है।

संस्कृति

संस्कृति शब्द का जन्म संस्कार शब्द से हुआ है इस का सामान्य अर्थ होता है” विभिन्न संस्कारों द्वारा सामाजिक समूह के उद्देश्यों की पूर्ति करना”।

पंडित जवाहरलाल नेहरू के अनुसार –

संस्कृति का अर्थ मनुष्य का आंतरिक विकास और उसकी नैतिक उन्नति, एक दूसरे के साथ व्यवहार तथा एक दूसरे को समझने की शक्ति से है।

लैंडिस इसके अनुसार –

संस्कृति व संसार है जिसमें एक व्यक्ति जन्म से लेकर मृत्यु तक निवास करता है चलता फिरता है और अपने अस्तित्व को बनाए रखता है।

 संस्कृति की विशेषताएं –

  • संस्कृति एक सीखी हुई योग्यता या क्षमता होती है।
  •  संस्कृति मानव निर्मित होती है।
  •  संस्कृति हस्तांतरित की जाती है।
  •  प्रत्येक समाज की एक विशिष्ट संस्कृति होती है।
  •   प्रत्येक संस्कृति की प्रकृति आदर्श आत्मक होती है।
  •  संस्कृति संपूर्ण सामाजिक विरासत होती है।
  •  संस्कृति एक  समन्वित प्रणाली है।
  •  भाषा संस्कृति का मुख्य वाहक  होती है।
  •  संस्कृति श्रम विभाजन द्वारा जटिल स्वरूपों में विकसित हो जाती है।

 संस्कृति के विभिन्न तत्व

जॉनसन के अनुसार :-

  • ज्ञानात्मक  तत्व
  •  विश्वास
  •  मूल्य और मानदंड
  •  संकेत ( लिखित और मौखिक)

  मेटास्पेंसर  के अनुसार –

  • प्रतीक
  •  मूल्य
  •  मानदंड
  •  लोक साहित्य
  •  कानून
  •  विचारधारा

संस्कृति के प्रकार :- Ogburn  के अनुसार संस्कृति के दो प्रकार होते हैं भौतिक संस्कृति और अभौतिक संस्कृति।

भौतिक संस्कृति :-  भौतिक संस्कृति के अंतर्गत वे चीजें आती है जिसका नियंत्रण मनुष्य करता है,साथ ही मूर्त रूप से होता है, उदाहरण पुस्तक,घर, मोटर,उपकरण इत्यादि।

अभौतिक संस्कृति :-  इसके अंतर्गत वे चीजें आती हैं जिनको हम प्रत्यक्ष ज्ञान इंद्रियों के माध्यम से देख नहीं सकते यह मूर्ति प्रकृति की होती है उदाहरण रूढ़ियां, धर्म, रिवाज आदि।

सभ्यता और संस्कृति में अंतर :-

क्रमांक  सभ्यता  संस्कृति
1.  सभ्यता का प्रसार चारों ओर होता है।  संस्कृति का प्रसार केवल एक ही दिशा में होता है।
2.  सभ्यता का मूल्यांकन आसानी से किया जा सकता है।  संस्कृति का मूल्यांकन जटिल प्रक्रिया होती है।
3.  सभ्यता के प्रति मानसिक लगाव नहीं होता।  संस्कृति के प्रति समाज का भावनात्मक लगाव होता है।
4.  सभ्यता में रेखीय परिवर्तन होता है।  संस्कृति में चक्रीय परिवर्तन होता है।
5.  सभ्यता मूर्त अवस्था में होती है।  संस्कृति अवस्था में होती है।
6.  सभ्यता साधन है।  संस्कृति साध्य है।
7.  सभ्यता निरंतर आगे बढ़ती है।  संस्कृति की दिशा निर्धारित नहीं होती।
8.  सभ्यता का संबंध भौतिक वस्तुओं से होता है।  संस्कृति का संबंध मानव  के विचारों एवं अतिरिक्त गुणों से होता है।
9.  सभ्यता व्यक्ति को भोगवादी बनाती है।  संस्कृति व्यक्ति को संगम सिखाती है।

 

सभ्यता और संस्कृति में संबंध :-

सभ्यता और संस्कृति में अंतर होने के बावजूद भी यह परस्पर एक दूसरे की पूरक भी है कभी-कभी इनमें फर्स्ट ईयर सेटिंग अंतर करना चुनौतीपूर्ण हो जाता है ऐसा माना जाता है कि यह दोनों आपस में एक दूसरे को प्रभावित करती थी हैं और प्रभावित होती भी है।

मैकाइवर एवं पेज के अनुसार-  इन्होंने सभ्यता और संस्कृति के अंतर्संबंध को व्यक्त करने वाले विभिन्न आयाम बतलाए हैं जैसे

  • सभ्यता संस्कृति की वाहक है।
  •  सभ्यता संस्कृति का पर्यावरण है।
  •  सभ्यता की दिशा को संस्कृति प्रभावित करती है।
  •  सभ्यता सांस्कृतिक क्रियाओं को शक्ति प्रदान करती है।

भारतीय सभ्यता  और संस्कृति का वर्तमान स्वरूप एवं महत्व :-

भारतीय संस्कृति व सभ्यता  विश्व की सर्वाधिक प्राचीन एवं समृद्धि सभ्यता है, इसे विश्व की सभी संस्कृतियों की जननी माना जाता है। जीने की कला हो, विज्ञान या राजनीति, भारतीय संस्कृति विशेष स्थान रहा है। अन्य देशों की संस्कृतिया  समय की धारा के साथ नष्ट होती रही है किंतु भारतीय संस्कृति एवं सभ्यता आदि काल से ही अपने परंपरागत अस्तित्व के साथ अजर अमर है। आज सभ्यता और संस्कृति को एक-दूसरे का पर्याय समझा जाने लगा है लेकिन वास्तव में संस्कृति और सभ्यता अलग अलग है।

हम कह सकते हैं कि सभ्यता का संबंध बाहरी जीवन के परिप्रेक्ष्य से होता है जैसे खान पान रहन सहन जबकि संस्कृति का संबंध हमारी  सोच चिंतन और विचारधारा से होता है।संस्कृति का क्षेत्र सभ्यता से कहीं अधिक व्यापक और गहन होता है, अतः हम कह सकते हैं कि  सभ्यता शरीर है तो संस्कृति उसकी आत्मा।

यदि हम वर्तमान सभ्यता और संस्कृति पर नजर डालें तो आज  पश्चिमीकरण और आधुनिकता का दौर चल रहा है वर्तमान सभ्यता अपनी प्रारंभिक अवस्था में है इस सभ्यता को आधुनिक सभ्यता कहा जा सकता है और यह आधुनिकीकरण की शुरुआत है फिर यह सभ्यता अपनी परिपक्व  स्थिति में पहुंचेगी यह आने वाली सभ्यता संभवत वह मशीन आधारित एवं डिजिटल युग के नाम से जानी जावेगी।

सभ्यता का यह चक्रीय क्रम निरंतर चलता रहेगा आवश्यकता है कि हम अपने भारतीय संस्कृति और सभ्यता को, इसकी गौरवपूर्ण विरासत को  बनाए रखना है ,और पाश्चात्य अंधानुकरण से बचते हुए निरंतर  तार्किक सुधारों  की ओर अग्रसर रहना है।

यह लेख सुश्री प्रियंका जाटव ने लिखा है।
Join Us @ Telegram https://t.me/mppsc_content
Disclaimer – The above article is compiled by the member of team mppsc.org from various sources available online and offline, while the writing expression is given by the members of team mppsc.org . Moreover the article is solely for instructional / educational purpose only, which is free with no subscription charges on this platform and does not intend to cause any copyright infringement. If anyone has any issue regarding the same email us – team@mppsc.org or mppsc.org@gmail.com describing your rights (with valid proof attached in pdf format) to unpublish the article or to mention credit.

Leave a Reply

Your email address will not be published.

You may use these <abbr title="HyperText Markup Language">html</abbr> tags and attributes: <a href="" title=""> <abbr title=""> <acronym title=""> <b> <blockquote cite=""> <cite> <code> <del datetime=""> <em> <i> <q cite=""> <s> <strike> <strong>

*

error: Content is protected !!!!!

Join Our Online/Offline Classes Today!!!!!
By Dr. Ayush Sir!!!!!

For More Details Please
Call us at 7089851354
Ask at Telegram https://t.me/mppsc_content