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रानी दुर्गावती

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रानी दुर्गावती

  • दुर्गावती गोंडवाना की शासिका थी, जिसने 1524 से 1564 तक गोंडवाना पर शासन किया वह एक चंदेल राजकुमारी थी जिसके पिता कीरत सिंह थे
  • दुर्गावती का विवाह दलपत शाह के साथ हुआ था जोकि संग्राम शाह का बड़ा पुत्र था, इस तरह चंदेलो और  गोंडो के वैवाहिक संबंधों से शेरशाह सूरी के विस्तार की नीति को रोका जा सका।
  • 1550 में दलपत शाह की मृत्यु के बाद उसके पुत्र वीर नारायण के नाम से रानी दुर्गावती ने गोंड साम्राज्य को संभाला, उसे अपने दीवान व्यैाहर आधार सिंह तथा एक मंत्री मान ठाकुर का सहयोग मिला।
  • रानी ने  अपनी राजधानी को चौरागढ़ से सिंह और गढ़ स्थानांतरित कर दिया, चौरागढ़ एक रणनीतिक स्थान था जो सतपुड़ा की पहाड़ियों में अवस्थित था उसने कई कल्याणार्थ संस्थाएं जैसे धर्मशाला, मठो का निर्माण करवाया।
  • दुर्गावती को 1556 में एक और समस्या का सामना करना पड़ा जब बाज बहादुर ने रानी दुर्गावती  के राज्य पर हमला कर दिया, जिसके जवाब में रानी ने विरोधी सेनाओं को भारी नुकसान पहुंचाया तथा विजयी हुई।
  • 1562 में जब अकबर ने बाज बहादुर को पराजित कर मालवा को अपने साम्राज्य में मिला लिया , जिससे अब मुगल साम्राज्य की सीमाएं गोंड साम्राज्य को  छूने लगी ,तब एक मुगल जनरल आसफ खान गोंड राज्य की संपन्नता को देखकर लालायित हो गया तथा अकबर का  आदेश लेकर उसने गोंड साम्राज्य पर हमला कर दिया रानी ने अपने राज्य की सुरक्षा के लिए सब कुछ किया किंतु मुगलों की शक्तिशाली सेना रानी को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया तथा एक सुरक्षात्मक युद्ध लड़ने के लिए रानी पहाड़ी क्षेत्रों में जहां गौर और नर्मदा नदी थी पहुंच गई इस तरह रानी इस युद्ध में विजयी हुई।
  • किंतु अगले दिन आसफ खान ज्यादा सैनिक को के साथ आया और रानी भी युद्ध में उतर आए इस युद्ध में रानी के पुत्र वीर नारायण ने भी भाग लिया रानी युद्ध में घायल हो गई तथा अपने आप सम्मान की रक्षा के लिए रानी ने स्वयं को मार दिया।
  •  रानी दुर्गावती एक बड़ी शक्ति के विरोध में एक छोटी शक्ति की स्वतंत्रता तथा संप्रभुता की लड़ाई का जीता जागता प्रतीक थी रानी की अमरता, साहस , जिजीविषा का एक स्मरणीय अध्याय है रानी को सम्मान देने के लिए 1983 में मध्य प्रदेश सरकार ने जबलपुर  विश्वविद्यालय का नाम बदलकर रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय रख दिया।

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