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मध्यप्रदेश के सिंचाई संसाधन

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मध्यप्रदेश के सिंचाई संसाधन

मध्यप्रदेश का अधिकांश भाग कृषि पर निर्भर करता है, 231/2 उत्तरी अक्षांश प्रदेश के लगभग मध्य से गुजरती है इस रेखा के उत्तर भाग शीतोष्ण एवं दक्षिण भाग उष्णकटिबंधीय में आता है; यहां जलवायु की विविधता के कारण यह मानसूनी जलवायु प्रदेश में पायी जाती है, यहां की कृषि मानसून पर ही निर्भर करती है प्रदेश की सकल जल संपदा 90.75 अरब घनमीटर है, इसमें 112 लाख हेक्टेयर में सिंचाई हो सकती है।

  • 1905 में ग्वालियर राज्य के तत्कालीन महाराज ने राज्य में सिंचाई विभाग की स्थापना की थी।
  • 1956 में मध्यप्रदेश में जल संसाधन विभाग की स्थापना की गई थी।
  • प्रदेश में सर्वाधिक सिंचित जिले दतिया, शिवपुर, मुरैना,ग्वालियर।
  • प्रदेश की न्यूनतम संचित जिले डिंडोरी, अनूपपुर, मंडला, शहडोल।
  • प्रदेश में भूमिगत जल भंडारण 2.25 करोड़ एकड़ फीट है ।

मध्यप्रदेश में सिंचाई के साधन निम्नलिखित है

1. कुएं एवं नलकूप

  • राज्य में कुएं और नलकूपों में सर्वाधिक सिचाई होती है 67.34% भू भाग पर सिंचाई होती है।
  • प्रदेश में सिंचाई का प्रमुख साधन से सिंचाई मुख्यता मालवा के पठार व उत्तरी जिलों में होती है

2. नहर

  • मध्यप्रदेश में नहरों से तो 20.24 प्रतिशत सिंचाई की जाती है, जिसमें शासकीय नहरी से सिंचित भूभाग 16.8% है।
  • सर्वाधिक नहरों से सिंचाई चंबल के क्षेत्र ग्वालियर, भिंड ,मुरैना तथा बुंदेलखंड क्षेत्र में टीकमगढ़ ,छतरपुर जिला में की जाती है।

3. तालाब

  • यह सिंचाई का तीसरा मुख्य साधन है तालाब से वर्तमान में 3.2% क्षेत्र पर सिंचाई की जाती है बालाघाट,छिन्दवाड़ा, सिवनी जिलों में सिंचाई तालाब से ही की जाती है।
  • सर्वाधिक चंदेल शासकों ने खजुराहो में तालाब निर्माण प्रारंभ किया था।

 4. अन्य स्त्रोत

  • पोखर, नाले तथा डबरी आदि के माध्यमों से भी सिंचाई की जाती है।

मध्य प्रदेश की सिंचित पेटियां

मध्यप्रदेश में सिंचित क्षेत्रों को अध्ययन की सुविधा से चार पेटियों में विभाजित किया गया है ।

1. उच्च सिंचित पेटी

  • नहरों के जाल से परिपूर्ण यह पेटी उत्तरी मध्य प्रदेश स्थित चंबल क्षेत्र में है यहां शुद्ध बोया गया क्षेत्र औसतन 40% से अधिक है ।
  • इसके अंतर्गत ग्वालियर, टीकमगढ़, होशंगाबाद, मुरैना ,राज्य के सर्वाधिक सिंचित जिले शामिल है ।
  • सर्वाधिक सिंचित जिला ग्वालियर जबकि सर्वाधिक शुद्ध सिंचित जिला होशंगाबाद है।

2  मध्यम सिंचित पेटी

  • ठीक नीचे पश्चिम से पूर्व मध्य पूर्व इस पेटी का विस्तार पाया जाता है, यहां औसतन 35 से 40% क्षेत्र पर सिंचाई की जाती है।
  • शिवपुरी से लेकर छतरपुर तक यह जिले शामिल है उत्तरी क्षेत्र में भिंड और दक्षिणी क्षेत्र में बालाघाट शामिल है ।

3. अल्प सिंचित क्षेत्र

  • इस पेटी का विस्तार नर्मदा घाटी स्थित राज्य के पश्चिमी जिले में जिलों में पाया जाता है ।
  • यहां पर 23-35% कृषि सिंचित क्षेत्र है यहां कुओं व नलकूपों से सिंचाई की जाती है इसमें उज्जैन, इंदौर संभाग तथा होशंगाबाद संभाग का हरदा जिला भी आता है ।

4. न्यूनतम सिंचित पेटी

  • यहां पर उत्तर पेटी का 25% से कम से सिंचित है, इसके अंतर्गत रीवा का पठार बुंदेलखंड के क्षेत्र सतपुड़ा के क्षेत्र आदि शामिल है, बालाघाट को छोड़कर यहां पर डिंडोरी में राज्य न्यूनतम सिंचित जिला है ।
  • इस जिले में तालाब सिंचाई का प्रमुख साधन है।

Read Here मध्यप्रदेश की प्रमुख सिंचाई परियोजनाएं

This article is compiled by Supriya Kudraya.

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