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मध्यप्रदेश के मेले

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मध्य प्रदेश के मेले

त्योहारों धार्मिक आस्थाओं के प्रति सम्मान दर्शाने व सामाजिक व्यवस्थाओं खुशियों को प्रकट करने के माध्यम के रूप में मेले को माना गया है ।अधिकतर जनसंख्या कृषि से जुड़ी हुई है धार्मिक पर्व तथा कृषि उत्पादन के आने के दौरान कई त्योहार मनाए जाते हैं व इन त्योहारो मेलों का आयोजन किया जाता है। मध्य प्रदेश में लगभग प्रतिवर्ष 1400 मेले लगते हैं ।

  • मध्यप्रदेश में सर्वाधिक मेले उज्जैन संभाग 227 में लगते हैं जबकि इंदौर संभाग में लगभग 203 मेले लगते हैं ।
  • मध्य प्रदेश में सबसे कम मेले होशंगाबाद संभाग में लगते हैं ।
  • मौसम के अनुसार ऐसा माना जाता है कि सबसे अधिक मेले चैत्रमास अर्थात मात्र मार्च-अप्रैल व वैशाख माह अर्थात अप्रैल-मई में लगते हैं।
  • आषाढ़ ,सावन अर्थात जून-जुलाई-अगस्त मैं लगाए जाते हैं।

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मध्य प्रदेश के प्रमुख मेले निम्नलिखित हैं।

1. जागेश्वरी देवी का मेला

  • स्थान- अशोकनगर जिले के चंदेरी नामक नगर
  • समय- प्रतिवर्ष चैत्र माह अर्थात मार्च-अप्रैल
  • इसमें पशुओं का मेला भी लगता है, पशुओं की क्रय-विक्रय किया जाता है।

2.काना बाबा का मेला

  • स्थान- हरदा जिले के ग्राम सोडलपुर में प्रतिवर्ष लगता है ।
  • यह मेला 300 वर्षों से लगातार लग रहा है ।
  • यहां पर काना बाबा ने जीवित समाधि ली थी उसी स्थान पर 1714 से मेला लगाया जा रहा है।
  • यह सोडलपुर के एक महान सन्त के रूप में जाने जाते हैं।

3. गरीब नाथ का मेला

  • स्थान -शाजापुर जिले के अवंती बड़ोरिया ग्राम में
  • समय -चैत्र माह अर्थात मार्च-अप्रैल
  • बाबा गरीब नाथ संप्रदाय के अनुयाई तनु अनुयाई थे।
  • बाबा गरीब नाथ के प्रति सम्मान प्रकट करने के लिए यह मेला लगाया जाता है ।

4. नागा जी का मेला

  • स्थान -मुरैना जिले की पोरसा ग्राम में
  • समय -अगहन माह अर्थात नवंबर दिसंबर
  • इस मेले में बंदर बेचे जाते थे परंतु अब कुछ अन्य पालतू पशुओं की बिक्री की जाती है यहां पर मध्य प्रदेश के अलावा राजस्थान,उत्तर प्रदेश से भी व्यापारी आते हैं।
  • सम्राट अकबर के समकालीन नागाजी नामक संत की स्मृति में यह मेला प्रतिवर्ष लगाया जाता है।

5. हरी भूमिया का मेला

  • यह ग्वालियर व गुना के आसपास
  • समय- भादो मास अर्थात अगस्त सितंबर
  • यह मेला लगभग 1000 वर्ष पुराना है ,यह बाबा हीरामन की स्मृति में भरता है।

6. धामोनी उर्स

  • स्थान -सागर जिले के धमोनी ग्राम में
  • समय -अप्रैल-मई महीने में
  • यह मस्तान शाह की दरगाह पर छह दिवसीय मेला लगाया जाता है यहां दो मुस्लिम संत बालजती शाह और मस्तान अली शाह की मजारे हैं।
  • इसमें सभी धर्म के लोग आते हैं।

7. रामलीला का मेला

  • स्थान- मध्य प्रदेश के दतिया जिले के भांडेर तहसील में
  • यह प्रतिवर्ष लगाया जाता है।
  • समय -माघ माह में
  • यह मेला लगभग 110 साल पुराना है इस उत्सव को स्वामी पीतांबर दास ने प्रारंभ किया था ।
  • किंवदंतियों के अनुसार प्रारंभ में भांडेर एक सूवा था जिसके मुसलमान कलेक्टर इमाम तुल्लाह एक राम भक्त थे।
  • यह मेला आसपास के क्षेत्रों में अत्यंत लोकप्रिय हैं ।

8. पीरबुधान का मेला

  • स्थान -मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के जावरा ग्राम में
  • यह प्रतिवर्ष लगाया जाता है।
  • माह भादो माह अर्थात अगस्त- सितंबर
  • यह पीरबुधान नामक एक मुस्लिम संत की मजार पर लगाया जाता है।
  • यह 250 वर्ष पुराना है इस मजार के सामने जो अपनी इच्छा प्रकट करता है ऐसी मान्यता है कि पीर बुधान उसे पूरा करते हैं ।

10. तेजाजी का मेला

  • स्थान -गुना जिले के भामावद ग्राम में
  • समय -भादो माह अर्थात अगस्त
  • यह तेजा जी के जन्मदिवस पर 70 से अधिक वर्षों से लगाया जा रहा है।
  • यह मेला निमाड़ में भी लगता है इस मेले में आसपास के विभिन्न क्षेत्रों से लोग आते हैं।
  • ऐसी मान्यता है कि तेजाजी का नाम लेने भर से सांप के काटे हुए व्यक्ति को राहत मिलती है।

11. महामृत्युंजय मेला

  • स्थान -मध्य प्रदेश के रीवा जिले में
  • समय- बसंत पंचमी व शिवरात्रि के अवसर पर
  • यह बघेलखंड का एक प्रमुख धार्मिक मेला है ।
  • यह महाराज विक्रमादित्य जिसने रीवा शहर बसाया था तब से मंदिर प्रमुख पूजा स्थान था तभी से यह मेला लगाया जाता है।

12. अमरकंटक का शिवरात्रि मेला

  • •स्थान -अनूपपुर जिले अमरकंटक में
  • समय -शिवरात्रि पर प्रतिवर्ष
  • 1914 से यह लगाया जा रहा है नर्मदा नदी के उद्गम स्थान पर यह भगवान के साथ ही अनेक हिंदू देवी देवताओं का मंदिर है।

13. चांदी देवी का मेला

  • स्थान सीधी जिले के घोघारा में
  • समय- चैत्र माह अर्थात मार्च-अप्रैल प्रतिवर्ष
  • यह मान्यता है कि अकबर का दरबारी बीरबल यहां का रहने वाला था और यहाँ पर सरस्वती देवी ने बीरबल को आशीर्वाद दिया था।

14. बाबा साहब उद्दीन औलिया का उर्स

  • स्थान- नीमच जिले में बाबा साहब उद्दीन औलिया की दरगाह पर
  • समय -फरवरी माह में प्रत्येक वर्ष चार दिवसीय मेला
  • यह लगभग 90 वर्षों से लगातार भरता है।
  • शहाबुद्दीन औलिया उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के निवासी थे।

15. कालू जी का मेला

  • स्थान -खरगोन जिले में पिपल्या में
  • 225 वर्ष से लगता है ।
  • समय -अगस्त-सितंबर
  • यह मेला लगभग एक माह चलता है कालू जी महाराज संत सिंगाजी के भतीजे थे कालू जी महाराज यहां पर अपनी शक्ति से आदमियों और जानवरों की बीमारियां ठीक करते थे।

15. सिंगाजी का मेला

  • स्थान- खरगोन जिले के पिपल्या गांव में
  • समय- कार्तिक माह अर्थात अगस्त- सितंबर
  • यह शब्द सात दिवसीय मेला है संत सिंगाजी चरवाहा जाति के थे
  • यह मेला लगभग 400 वर्षों से यहां पर लगता है।

16. मांधाता का मेला

  • स्थान -मध्य प्रदेश के खंडवा जिले के मांधाता गांव में
  • समय -कार्तिक माह अगस्त सितंबर
  • यह सात दिवसीय मेला है कार्तिक माह में शिवजी की पूजा की जाती है।
  • ओम कालेश्वर में कार्तिक माह में लगता है भगवान भगवान शिव की पूजा करने के लिए एकत्रित होते हैं और मेला भरता है।

17. बरमान घाट का मेला

  • स्थान- नरसिंहपुर जिले की गाडरवारा तहसील में
  • समय -मकर संक्रांति के अवसर पर पौष माह अर्थात जनवरी
  • यह है 13 दिन तक चलता है।

18. माथ धोधरा का मेला

  • स्थान -सिवनी जिले के भैरोथान
  • समय -शिवरात्रि पर प्रतिवर्ष
  • एक प्राकृतिक गुफा है और वहां पानी की झील भी है ।
  • किंवदंतियों के अनुसार भगवान शिव यहां प्रकट हुए ऐसा माना जाता है ।

19. कुंभ का मेला

  • यह विश्व प्रसिद्ध कुंभ का मेला 12 वर्ष के अंतराल में लगाया जाता है।
  • स्थान -शिप्रा नदी के किनारे उज्जैन महाकाल की नगरी में
  • इसके अतिरिक्त इलाहाबाद ,हरिद्वार महाराष्ट्र के नासिक में भी कुंभ मेला लगता है ।
  • इस मेले में साधु-संतों और अखाड़ों के साथ ही धार्मिक आयोजनों व प्रवचनों के साथ बड़ी संख्या में व्यापारिक गतिविधियां होती हैं ।
  • इसमें करोड़ों लोग भाग लेते हैं संख्या की दृष्टि से इसे राज्य का सबसे बड़ा मेला माना जाता है ।
  • 2016 में मध्य प्रदेश के उज्जैन में कुंभ के मेले का आयोजन किया गया था।

20. शहीद का मेला

  • स्थान -इंदौर जिले में सनावद ग्राम में

21. सिद्ध बाबा का मेला

  • स्थान -विजयपुर तहसील प्रतिवर्ष लगता है
  • इस मेले में पहले दिन पशुओं का मेला भरता है फिर सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं।

22. जटाशंकर महादेव मेला

  • स्थान -दमोह के जटाशंकर महादेव मंदिर में
  • समय- मकर सक्रांति पर तीन दिवसीय मेला

23. लक्ष्मण कुटी मेला

  • स्थान -दमोह जिले के हटा रोड पर लक्ष्मण धाम, लक्ष्मण कुटी
  • समय -मकर सक्रांति तीन दिवसीय मेले का आयोजन
  • यहां सिद्धेश्वर भोले बाबा का मंदिर है मेले मेले में सिद्धेश्वर नाथ के रक्षार्थ यहां पहुंचते हैं।

24. जागेश्वरी नाथ धाम का मेला

  • स्थान -दमोह जिले के बांदकपुर में जागेश्वरी धाम पर
  • समय- मकर सक्रांति ,गणेश चतुर्थी, बसंत पंचमी, महाशिवरात्रि और सोमवती अमावस्या पर ।
  • यहां प्राचीन विशाल भगवान महादेव की शिवलिंग है।

25. बड़े बाबा का मेला

  • स्थान -कुंडलपुर
  • समय -माघ शुल्क पर प्रतिवर्ष यह मेला कुंडलपुर में आयोजित किया जाता है।
  • यह एक जैन तीर्थ स्थल है यहां पर 60 मंदिर हैं ।

26. कुंडेश्वर का मेला

  • स्थान- टीकमगढ़ जिले में कुंडेश्वर में
  • समय -मकर सक्रांति ,शिवरात्रि एवं ढोल ग्यारस के पर्व पर
  • यहां पर शिव मंदिर के पास पास ही मेला लगता है।

27. ओरछा का मेला

  • स्थान- ओरछा
  • समय -चैत्र शुल्क नवमी
  • यह ओरछा भगवान राम की नगरी है यह धार्मिक रंग यहां पर मेले में धार्मिक रंगारंग देखने को मिलता है।

28. प्राणनाथ का शरद समैया मेला

  • स्थान- पन्ना की प्राणनाथ परिसर में
  • समय- शरद पूर्णिमा पर
  • यहां पर महाराज सत छत्रसाल के गुरु और प्रणामी संप्रदाय के प्रणेता स्वामी प्राणनाथ की स्मृति में मेले का आयोजन किया जाता है ।

29. जनकपुर का मेला

  • स्थान -पन्ना के करीब 5 किलोमीटर दूर पहाड़ी खेड़ा मार्ग पर ग्राम जनकपुर में
  • समय -रथयात्रा के अवसर पर चार दिवसीय मेले का आयोजन होता है।
  • यहां पर जगन्नाथ स्वामी मंदिर से भगवान जगन्नाथ की यात्रा निकालकर ग्राम जनकपुर तक जाती है।

30. कलेही का मेला

  • स्थान -पन्ना जिले के कुआंताल में
  • समय-नवरात्रि के अवसर पर यहां कालका देवी का मंदिर है

31. नांदचांद का मेला

  • स्थान -पन्ना जिले के ग्राम बगवार के निकट नांदचांद में
  • समय- मकर संक्रांति के अवसर पर सात दिवसीय मेला ।

32. राम जानकी का मेला

  • स्थान -बिजावर
  • यह जानकी मेला बिजावर क्षेत्र में काफी प्राचीन मेला है यह मेला एक पखवाड़े तक चलता है ।

33. जल बिहारी का मेला

  • स्थान- छतरपुर
  • समय -अक्टूबर-नवंबर माह में
  • दशहरा और दिवाली के यह प्रतिवर्ष लगाया जाता है ।
  • इस मेले का आयोजन शासकीय खर्च पर आयोजित होता है यहां पर शासकीय प्रदर्शनी अभी लगती हैं साथ में दर्शकों को लुभाने के लिए कई व्यवसाई मनोरंजन के साधन लेकर पहुंचते हैं।
  • जल बिहारी का मेला नवंबर माह में हरपालपुर में भी लगता है इस सीमा हमें बिजावर तहसील अनवर गांव और सड़वा गांव में तीन दिवसीय मेला लगता है ।

34. अबार माता का मेला

  • स्थान -छतरपुर जिले में अबार माता स्थान पर
  • समय- मई में यह एक माह तक चलता है ।

35. जटाशंकर का मेला

  • स्थान -छतरपुर जिले के जटाशंकर तीर्थ पर
  • यह हर अमावस्या को लगता है जटाशंकर एक प्राकृतिक मनोरम स्थल है यहां पर पहाड़ पर स्थित शिव मंदिर है जिसे जटाशंकर के नाम से मशहूर है ।
  • यहां पर सबसे बड़ा मेला मकर सक्रांति पर लगता है ।

36. पादुका का मेला

  • स्थान- छतरपुर जिला
  • चरण पादुका में समय मकर संक्रांति के अवसर पर मकर संक्रांति के अवसर पर मेले को लोग शहीद मेला भी कहते हैं।
  • दरअसल चरण पादुका का स्वतंत्र संग्राम में एक अद्भुत व अनुपम स्थान है ।
  • 14 जनवरी 1933 को मकर सक्रांति रोज पर उर्मिल नदी के तट पर यह मेला लगाया जाता है।
  • इस मेले का आयोजन स्वतंत्र सेनानी की एक सभा तथा अंग्रेजों ने गोलियां बरसा दी जिससे कई लोग शहीद हो गए और घायल हो गए इस स्थान पर मकर सक्रांति शहीदों की याद में मेला लगाया जाता उर्मिल नदी के किनारे पर बड़ी संख्या में पैरों के चिन्ह अंकित हैं।
  • ऐसा माना जाता है कि भगवान राम वनवास के समय यहां आए थे और यही चरण चिन्ह भगवान राम के ही हैं
  • इसी कारण वहां का नाम चरण पादुका के नाम से जाना जाता है।

37. मऊसाहनिया का मेला

  • स्थान -छतरपुर जिले से 16 किलोमीटर दूर मऊ साहनिया ग्राम में इस
  • समय- मकर सक्रांति पर
  • जगत सागर मेला काफी पुराना है मकर सक्रांति पर ही छतरपुर के महाराजपुर के निकट कुंभ हेड नदी पर 1 सप्ताह कुम्हेंणबमेला लगाया जाता है।

38. देवरी का मेला

  • स्थान- सागर जिले के देवरी में
  • समय -अगहन माह के शुल्क पक्ष की षष्ठी तिथि पर माह की शुल्क पक्ष
  • यहाँ खंडेराव मंदिर में यह मंदिर स्वयंभू शिवलिंग बा पार्वती जी का है इस मंदिर का नामकरण पार्वती की प्रतिमा के हाथ में खड़क होने के कारण खंडेराव पड़ा इस मंदिर में शिव पार्वती की प्रतिमाओं के अतिरिक्त अन्य प्रतिमाएं भी हैं।

39. भापेल का मेला

  • स्थान -सागर जिले की भापेल में महादेव मंदिर जिसे फूल नाथ मंदिर भी कहा जाता है।
  • 1957 में अंग्रेज सैनिक टुकड़ी और विद्रोही की भी यही युद्ध हुआ था।
  • समय -कार्तिक पूर्णिमा पर प्रतिवर्ष

40. सनोधा का मेला

  • स्थान -सागर सनोदा किला सक्रांति आठ दिवसीय मेला ऐसा कहा जाता है।

41. बनेनी घाट का मेला

  • स्थान- सागर जिले की राहतगढ़ में बीना नदी के तट पर एक प्राचीन शिव मंदिर में
  • इसी के नजदीक एक शिव भक्त है जहां पर शिवरात्रि मेला भरता है।
  • समय- कार्तिक पूर्णिमा

42. उल्दन का मेला

  • उल्दन का मेला स्थान सागर जिले की ग्राम उल्दन में धसान और आंडेर नदियों के संगम पर।
  • समय- मकर सक्रांति पर

43. गढ़ाकोटा का रहस मेला

  • स्थान- गढ़ाकोटा
  • समय -प्रति वर्ष फरवरी में बसंत पंचमी के अवसर पर
  • इस मेले में बड़ी संख्या में मवेशियों की खरीद बिक्री होती है ऐसा माना जाता है कि यह मेला 1785 में मर्दन सिंह नामक राजा के गढ़ाकोटा का उत्तराधिकारी बनने के बाद से भरता आ रहा है ।
  • यहां पर नृत्य करने के लिए दूर-दूर से रास मंडली व स्वांग रचने वाले लोग आते हैं।

44. चंडी देवी का मेला

  • स्थान -सीधी के धीधर में

45. हीरामन बाबा का मेला

  • स्थान- ग्वालियर और उसके आसपास
  • समय- अगस्त-सितंबरमें

46. शिव मेला

  • स्थान -भोपाल

47. सलकनपुर मेला

  • स्थान-सलकनपुर जिला होशंगाबाद

48. ग्वालियर का व्यापारिक मेला •स्थान – ग्वालियर

  • यह एक पशु मेला है इस मेले का प्राथमिक उद्देश्य क्षेत्र के व्यापारिक गतिविधियों का विकास व विस्तार है।

49. रावतपुरा सरकार का मेला

  • स्थान- भिंड जिले के लहार तहसील में रावतपुरा।
  • गांव में यह 1997 से लगना प्रारंभ

50. शिवरात्रि मेला

  • स्थान -पचमढ़ी में शिवरात्रि के अवसर पर

51. रामजी बाबा का मेला

  • स्थान- होशंगाबाद में प्रतिवर्ष

52. कपिलेश्वर मंदिर का मेला

  • स्थान -राजगढ़ जिले की सारंगपुर •समय- कार्तिक माह

53. कालका मंदिर मेला

  • स्थान -धार

53. उन्नाव का मेला

  • स्थान -दतिया शहर से 17 किलोमीटर दूर उन्नाव में जहां भगवान भास्कर की विशाल प्रतिमा।

54. रतनगढ़ का मेला

  • स्थान -दतिया जिले के
  • दतिया-सेवड़ा मार्ग पर

55. सोनागिरी का मेला

  • स्थान -दतिया जिले के सोनागिरी
  • समय- चैत्र प्रतिपदा
  • जैन पवित्र तीर्थ है यहां पर 108 जैन मंदिर है।

56. मैहर माता का मेला

  • स्थान -मां शारदा की नगरी मैहर में जिला सतना में प्रतिवर्ष

57. सनकुआं का मेला

  • स्थान- दतिया जिले के सेवड़ा में
  • सिंध नदी के किनारे ग्राम संकुआ

56. व्यवहार का चैती मेला

  • स्थान- राजगढ़

57. बलदाऊ जी का मेला

  • स्थान- पन्ना

58. द्रौपदी का मेला

  • स्थान- हीरापुर राम नवमी का मेला

59. राम नवमी का मेला

  • स्थान- नयागांव

60.त्रिवेणी का मेला

  • स्थान -रतलाम

61. केदाश्वर का मेला

  • स्थान -टीकमगढ़

62. खंडोबा का मेला

  • स्थान -देवरी सागर

This article is compiled by Supriya Kudraya.

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