Loading...

मध्य प्रदेश के प्रमुख लोकगीत

Follow Us @ Telegram

मध्य प्रदेश के प्रमुख लोकगीत या गायन

लोक गायन को शास्त्रीय संगीत के रूप में भले ही मान्यता प्राप्त ना हो, लेकिन यह लोकजीवन की अभिव्यक्ति को प्रदर्शित करता है।लोक गीत के माध्यम से जीवन में उत्साह बना रहता है। गायन के विषय में कहा जाता है कि यह हृदय से निकलकर कंठ तक आता है । प्रदेश के निमाड़, मालवा ,बुंदेलखंड, बघेलखंड अंचल में अनेक प्रकार के पारंपारिक लोक गायन शैलियां आदिकाल से प्रचलित है, जिन्हें विभिन्न पर्व, त्योहार व खुशी के मौके पर स्थानीय लोगों द्वारा गाया जाता है।

निमाड़ अंचल

निमाड़ अंचल में चाहे सुख हो या दुख सभी मौकों पर लोक गायन को गाया जाता है ।जन्म ,विवाह, मृत्यु ,सोलह संस्कार व अलग-अलग अवसरों का अलग-अलग त्योहारों के लिए अलग-अलग लोक गीत गाए जाते हैं। यह स्त्री व पुरुष दोनों के द्वारा गाए जाते हैं।

गवलन गायन शैली

  • क्षेत्र- निमाड़ अंचल
  • निमाड़ अंचल में पुरुष परक गीत त्योहार के अवसर पर गाए जाते हैं।
  • विषय वस्तु मूलतः कृष्ण की रास लीलाओं से संबंधित होते हैं।
  • गायन शैली मृदंग एवं ढोल पर एकल एवं सामूहिक गायन शैली।

कलगी – तुर्रा

  • क्षेत्र – संपूर्ण निवारण अंचल ।
  • यह शिव आराधना के गीत होते हैं व यह रात के समय गाए जाते हैं ।
  • इसमें दो अखाड़े होते हैं एक कलगी अखाड़ा दूसरा तुर्रा इनके गुरुओं को उस्ताद कहते हैं।
  • इसमें आध्यात्मिक रूप से 2 पक्ष होते हैं जिसमें कलगी दल शक्ति को और तुर्रा दल शिव को गायन के माध्यम से बताते हैं।

मसाण्या या कायखोज गीत

  • क्षेत्र – निमाड़ अंचल
  • यह व्यक्ति की मृत्यु पर आत्मा की अमरता के लिए गाए जाते हैं।
  • यह सामूहिक गायन शैली है।
  • ये पुरुष परक गीत होते हैं, मसाण्याबगीतों को झांझ, मृदंग और इकतारे के साथ सामूहिक रूप से गाया जाता है ।

नाग पंथी गायन

  • क्षेत्र -निमाड़ अंचल
  • प्रायः सुबह के समय गाए जाते हैं, इसमें कबीर के पद गाए जाते हैं।
  • निमाड़ अंचल में नाथ जोगी महिलाएं सुबह-सुबह गाती हुई घर-घर से नेग लेती हैं।

गरबा गायन शैली

  • क्षेत्र निमाड़ अंचल
  • यह स्त्री परक लोक गायन है।
  • यह नवरात्रि मैं देवी आराधना के भजन गाए जाते हैं ।
  • गरबा महिलाओं द्वारा गाए जाने वाली शैली है गायन के साथ महिलाएं नृत्य भी करती हैं।

गरबी गायन शैली

  • क्षेत्र -निमाड़ अंचल
  • गरबी गायन शैली पुरुष परक लोक गायन है ।
  • यह नवरात्रि में देवी श्रंगार एवं हास्य परक सामूहिक गायन शैली है।
  • यह निमाड़ी लोक नाटक का मुख्य अंग है इसमें गायन के साथ नृत्य भी किया जाता है।

मालवा

 

मालवा क्षेत्र में भी लोक गायन का अपना एक अलग महत्व है। पर्व त्योहार वह ऋतु संबंधी अनुष्ठान. जन्म, मुंडन विवाह, सगाई आदि के अवसर पर यह गाए जाते हैं। मालवा के लोक गायन में बोली की मिठास के साथ साथ प्रकृति व संस्कृति, समृद्धि और सौंदर्य के स्वर गूंजते हैं।
भरथरी गायन

  • क्षेत्र -मालवा अंचल
  • यह नाथ संप्रदाय के लोगों द्वारा गाए जाते हैं ।
  • इसमे एक अलग तरीके के वाद्य यंत्र य के द्वारा गाया जाता है, जो नारियल की नट्टी,बास और घोड़ों के बाल से निर्मित होता है और इससे बालों से बनाए गए धनुष के द्वारा बजाया जाता है।
  • यह प्रायः सुबह के समय गाए जाते हैं ।

संजा गायन

  • क्षेत्र -मालवा अंचल
  • यह किशोरियों का पारंपारिक गायन पद्धति है।
  • इसमें कोई बाद यंत्र का प्रयोग नहीं किया जाता है।
  • पितृपक्ष के समय किशोरियों द्वारा गाए जाते हैं गोबर और फूल पत्तियों से सुंदर संजा आकृति बनाई जाती है और शाम को उसकी पूजा कर संजा गीत गाए जाते हैं और सौलह वे दिन अमावस्या पर सभी किशोरिया मिलकर संजा को सम्मान पूर्वक विदा करती हैं ।

हीड़ गायन

  • क्षेत्र- मालवा अंचल
  • यह सावन के महीने में गाए जाते हैं व गोवर्धन पूजा के समय भी गाये जाते है।यह मूलतः अहिरो द्वारा गाए जाते हैं।

बरसाती गायन

  • क्षेत्र- मालवा अंचल
  • यह रात के समय गाए जाते हैं ।
  • यह चंपू काव्य शैली की तरह होते हैं, जिसमें गद्य और पद्य दोनों का समावेश होता है।

निमाड़ व मालवा

निरगुणिया गायन शैली

  • क्षेत्र – निमाड़ व मालवा अंचल
  • निरगुणि गायन परंपरा बहुत पुरानी है, इसमें कबीर के भजनों को गाया जाता है ।
  • यह साधु और भिक्षुओं द्वारा गाए जाते हैं।
  • प्रहलाद सिंह टिपाण्या का दल सर्वश्रेष्ठ है जिसने कबीर के मालवी लोक गायन को अपने स्वर और गायकी से देश में अलग पहचान दिलाई है ।

संत सिंगाजी भजन

  • क्षेत्र निमाड़ व मालवा अंचल
  • यह किसी भी अवसर पर गाए जाते हैं।
  • यह गायन खेती एवं गृहस्थी के प्रतीकों को अपने काव्य में स्थान दिया था, यह उन पदों की ही विशेषता बन गई है।
  • इसमें संत सिंगाजी कवियों में सबसे अग्रणी है यह मृदंग और झांझ के साथ उत्सव में गाए जाते हैं।

लावणी

  • क्षेत्र -निमाड़ व मालवा अंचल
  • यह प्राय: सुबह के समय गाए जाते हैं।
  • यह निर्गुणी दार्शनिक गीत होते हैं।

बुंदेलखंड

शौर्य व श्रंगार की धरती बुंदेलखंड कला एवं संस्कृति से भरपूर्ण बुंदेलखंड अंचल मध्य प्रदेश के बाकी अंचलों से अलग है यहां कि अपनी लोक शैलियां अलग ही तरीकों को प्रदर्शित करती हैं यहां के गीतों का माधुर्य की खास पहचान है बुंदेली लोक राग देश में प्रचलित है।

आल्हा गायन

  • क्षेत्र -बुंदेलखंड अंचल
  • इसमें वीर रस प्रधानता के का गाया जाता हैं।
  • यह याग्निक ने लगभग 1000 वर्ष पहले गए थे।
  • यह प्रायः वर्षा ऋतु में गाए जाते हैं।
  • इसमें वाद्य यंत्र के रूप में ढोलक और नगडिया का प्रयोग किया जाता है।ओज से भरे गीत होते हैं।
  • कहीं-कहीं इसका गायन खड़े होकर व हाथ में तलवार लेकर किया जाता है ।
  • आल्हा खंड संसार की सबसे लंबी गाथाओं में से एक है।

भोला, बंबोलिया या लमटेरा गीत

  • क्षेत्र- बुंदेलखंड अंचल
  • यह मधुर गीत होते हैं, इस में स्त्री व पुरुष द्वारा समूह बनाकर सावन महीने में व शिवरात्रि, बसंत, पंचमी मकर सक्रांति आदि के अवसर पर गाए जाते हैं।
  • यह गीत प्रायः प्रश्नोत्तर शैली में होते हैं जिसमें भोला गीत शिव और शक्ति से संबंधित है।
  • नर्मदा स्नान के लिए जाते समय महिलाएं भोला गीत का गायन करती हैं ।

वैरायता गायन

  • क्षेत्र – बुंदेलखंड अंचल
  • वैरायता मूलतः कथा शैली में गाए जाते हैं ।
  • यह धार्मिक त्योहारों पर रात के समय गाए जाते हैं इसमें केंद्र में एक व्यक्ति गाता है जो मुखिया होता है और साथ में सहयोगी भी गाते हैं।
  • इसकी गायन शैली में कलात्मकता के साथ-साथ प्रसंगाकूल और चेहरे के हाव-भाव भी प्रभावित करते हैं।

देवारी गायन या देवासी गायन

  • क्षेत्र -बुंदेलखंड अंचल
  • यह दीपावली के अवसर पर अहीरों द्वारा ग्वाल वाल बनकर और सिर पर मोर पंख धारण करते हुए घर-घर दिवाली मांगते या नेग मांगते हुए गाते हैं ।
  • इसमें बड़े उच्च स्वर में दोहा गाकर ढोलक नगडिया, बांसुरी की धुन पर तेजी से नृत्य करते हैं ।
  • इसमें कृष्ण राधा के विषय पर प्रेम प्रसंग भक्ति से भरे दोहे होते हैं।

जगदेव का पुवारा

  • क्षेत्र- बुंदेलखंड अंचल
  • यह मूलतः भजन शैली में गाए जाते हैं ।
  • यह देवी स्तुति से संबंधित आख्यान होते हैं जो चैत्र और क्वार की नवरात्रि के अवसर पर गाए जाते हैं ।
  • इन गीतों में लोक मधुरता होती है।

हरदौल की मनौती

  • क्षेत्र- बुंदेलखंड अंचल
  • यह गीत मर्मस्पर्शी गीत होते हैं, तथा इसमें वीर गाथाएं गाई जाती हैं।

निमाड़ ,मालवा व बुंदेलखंड

ढोला – मारू गीत

  • क्षेत्र -निमाड़, मालवा बुंदेलखंड
  • इसमें रात के समय ढोला और मारू की प्रेम कथाओं को गाया जाता है।

बघेलखंड

बघेली गायन शैली मध्य प्रदेश के अन्य अंचलों से थोड़ी भिन्न है यह अवधी से प्रभावित है, जहां कल्पना का वैभव प्रसारित है वही बघेलखंड की संस्कृति की झांकी भी प्रतिलंबित होती है ।

बसदेवा गायन

  • क्षेत्र – बघेलखंड अंचल
  • यह बघेलखंड की एक पारस्परिक गायन जाति हरबोले के द्वारा गाए जाते हैं ।
  • मूलत: यह बसदेव गाथा गायक हैं, इसमें श्रवण कुमार की गाथाओं को गाया जाता है।

बिरहा गायन

  • क्षेत्र – बघेलखंड अंचल
  • यह गायन नृत्य गायन है यह सुनसान राहों में गया जाता है।
  • इसका गायन गोड़ एवं बैगा आदिवासी विवाह एवं दीपावली के अवसर पर करते है और साथ में पुरुष स्त्रियों दोनों नृत्य भी करते हैं।
  • यह सवाल जवाब शैली में गाया जाता है।

विदेशिया गायन

  • क्षेत्र – बघेलखंड अंचल
  • यह समूचे बघेलखंड में देखने को मिलता है ।
  • विदेशिया राग लंबी और गंभीर होती है यह जंगल की सुनसान राहों में गाया जाता है ।
  • इसमें लोक नायक नायिका के मन की आतुरता का सहज वर्णन करता है मुख्यता इसमें वियोग श्रंगार के गीत होते हैं।

निमाड़, बघेलखंड व बुंदेलखंड

फाग गायन

  • क्षेत्र – बुंदेलखंड, बघेलखंड व निमाड़
  • बघेलखंड का फाग गायन बुंदेलखंड फाग गायन व निमाड़ गायन परस्पर भिन्नता पाई जाती है ।
  • इस गायन में पुरुषों की मुख्य भागीदारी होती है ।
  • इसका प्रमुख वाद्य यंत्र नगाड़ा होता है और यह उच्च स्वर में गाए जाते हैं।
  • यह गीत गायन जोशीला होता है।
  • बघेलखंड व बुंदेलखंड में फाग गायन की लोक मंडलिया होती हैं।
  • इसमें ईसुरी फाग व ठाकुर फाग गायी जाती है।

This article is compiled by Supriya Kudraya.

Join Us @ Telegram https://t.me/mppsc_content

Disclaimer – The above article is compiled by the member of team mppsc.org from various sources available online and offline, while the writing expression is given by the members of team mppsc.org . Moreover the article is solely for instructional / educational purpose only, which is free with no subscription charges on this platform and does not intend to cause any copyright infringement. If anyone has any issue regarding the same email us – team@mppsc.org or mppsc.org@gmail.com describing your rights (with valid proof attached in pdf format) to unpublish the article or to mention credit.

Leave a Reply

Your email address will not be published.

You may use these <abbr title="HyperText Markup Language">html</abbr> tags and attributes: <a href="" title=""> <abbr title=""> <acronym title=""> <b> <blockquote cite=""> <cite> <code> <del datetime=""> <em> <i> <q cite=""> <s> <strike> <strong>

*

This site is protected by reCAPTCHA and the Google Privacy Policy and Terms of Service apply.

error: Content is protected !!!!!

Join Our Online/Offline Classes Today!!!!!
By Dr. Ayush Sir!!!!!

For More Details Please
Call us at 7089851354
Ask at Telegram https://t.me/mppsc_content