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मध्य प्रदेश के लोक नृत्य

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मध्य प्रदेश के लोक नृत्य

 लोक नृत्य

मध्यप्रदेश में अलग-अलग क्षेत्रों में अपनी क्षेत्रता की पहचान को बनाए रखने के लिए विभिन्न प्रकार के लोक नृत्य किए जाते हैं । आइए हम जानते हैं कि किस क्षेत्र में कौन सा नृत्य प्रसिद्ध है।

निमाड़ अंचल के लोक नृत्य

1. गणगौर नृत्य

  • स्थान – निमाड़ अंचल
  • पर्व -यह चैत्र माह में गणगौर पर्व पर दो प्रकार से किया जाता है – झालरिया और झूला।
  • नृत्य में ढ़ोल व थाली वाद्य यंत्र बजाए जाते हैं ।
  • महिलाएं और पुरुष ‘रनुबाई’ और ‘घड़ीयेर’ (सूर्य देव के रथ) को सिर पर रख कर नाचते हैं ।
  • गणगौर एक लोक देवी हैं ।
  • यह लोक नृत्य मध्य प्रदेश के साथ राजस्थान ,गुजरात और मालवा में भी लोकप्रिय है ।
  • गणगौर पर्व निमाड़ी लोक जीवन का गीतिकाव्य है ।
folk music instrument

2. काठी नृत्य

  • स्थान – निमाड़ अंचल
  • पर्व – देव प्रबोधनी एकादशी से लेकर महाशिवरात्रि तक।
  • इसका ढाक प्रसिद्ध वाद्य यंत्र है।
  • नर्तकों का सिंगार अनूठा होता है, यह गले से पैरों तक पहना जाने वाला बना या बागा पहनते हैं।

3. फेफरिया नृत्य

  • स्थान – निमाड़ अंचल
  • पर्व – यह विवाह के अवसर पर किया जाता है ।
  • समूह नृत्य स्त्री व पुरुष दोनों करते हैं।

4. मन्डल्या नृत्य

  • स्थान – निमाड़ अंचल
  • विवाह व पर्व पर खुले आंगन में किया जाता है यह समूह नृत्य हैं, जो महिला परक हैं।

5. आड़ा-खडा नृत्य

  • स्थान- निमाड़ अंचल
  • पर्व- जन्म , मुंडन संस्कार व विवाह अवसर पर ।

6. डण्डा नृत्य

  • स्थान- निमाड़ अंचल
  • पर्व -चैत्र वैशाख की रात्रि में विशेषकर गणगौर पर्व पर किसानों द्वारा किया जाता है, पुरुष परक समूह नाच हैं।

मालवा अंचल के लोक नृत्य

1. मटकी नृत्य

  • स्थान – मालवा
  • पर्व – विशेष सगाई विवाह पर मालवा में।
  • मटकी नाच का अपना एक परंपरागत स्वरूप है, इसमें ढोल की ताल पर शहनाई बजाई जाने की परंपरा है।
  • मटकी केवल महिलाओं द्वारा किया जाता है, प्रारंभ में एक महिला नाचती है ।
  • इस नृत्य में पैरों व हाथों का संचालन दर्शनीय होता है।

 2. आड़ा-खडा रजवाड़ी नृत्य

  • स्थान- समूचे मालवा अंचल में
  • पर्व -विवाह में मंडप के नीचे अवश्य किया जाता है ।
  • यह नृत्य महिला परक है।
  • इसका प्रमुख वाद्य यंत्र ढोल है।

3. पतंग नृत्य

  • स्थान – मालवा अंचल
  • यह महिला नृत्य परंतु आजकल पुरुष भी विवाह आदि के अवसर पर करते हैं।

बुंदेलखंड के लोक नृत्य

1. कनाडा नृत्य

  • स्थान – बुंदेलखंड
  • पर्व -कजली तीज, कृष्ण परक गीत ।
  • मुख्य रूप से यह धोबी समाज द्वारा विवाह ,जन्म आदि शुभ अवसर पर करते है ।
  • आविवाहित लड़कियों द्वारा किया जाता है
  • इसमें मुख्य रूप से कृष्ण के चरित्र और स्थानों का वर्णन कर नृत्य किया जाता है।

2. ढिमरयाई नृत्य

  • स्थान – बुंदेलखंड
  • शादी ,विवाह, नवदुर्गा पर यह नृत्य किया जाता है।
  • ढीमर जाति द्वारा किया जाता है, यह ढीमर जाति का पारंपरिक नृत्य है।
  • केकड़ी या मृदंग ढोलक इसके प्रमुख वाद्य यंत्र हैं ।
  • इसमें एक अकेला नर्तक केकड़ी बजाता है, और नृत्य भी करता है।

 3. जवारा नृत्य

  • स्थान – बुंदेलखंड
  • पर्व – चैत्र व क्वार की नवरात्रि के समय किया जाता है।
  • इसमें देवी शक्ति आराधना स्वयं को विभिन्न पीड़ाएँ देकर की जाती है।

 4. अखाड़ा

  • स्थान – बुंदेलखंड
  • पर्व – दशहरे के अवसर पर शस्त्र पूजा के साथ इसमें शारीरिक कर्तव्य व्यायाम का संचालन कर परंपरागत रूप से अखाड़ों के रूप में संगठित है।
  • इसमें युद्ध कौशल शस्त्र संचालन व व्यायाम क्रियाओं को करतब के रूप में किया जाता है, व जुलूस भी निकाला जाता है।

5. सैरा नृत्य

  • स्थान – बुंदेलखंड
  • पर्व – श्रावन-भादो के महीने में विशेषकर तीज पर ग्रामवासी द्वारा घुटनों तक धोती पहनकर लाल रंग की तौलिए से ढोलक की थाप पर मंजीरो के साथ नृत्य करते हैं ।
  • नर्तकों की लोच – ललक व गीतों की लय बड़ी मनोहारी होते हैं।

6. बधाई नृत्य

  • स्थान – बुंदेलखंड
  • पर्व – शादी जन्म मनौती पूरी होने पर।

7. बरेदी नृत्य

  • स्थान – बुंदेलखंड
  • यह नृत्य कृषक चरवाहा संस्कृति से है ।
  • पर्व – यह नृत्य गीत दीपावली से पन्द्रह दिन पूर्णिमा तक चलता है ।
  • यह अत्यंत आकर्षक होता है।

बघेलखंड के लोक नृत्य

1. दादर नृत्य

  • स्थान – बघेलखंड
  • अधिकतर पुरुषों द्वारा खुशी के अवसर पर पुरुषों द्वारा स्त्री वेश धारण करके किया जाता है।

2. कलसा नृत्य

  • स्थान – बघेलखंड
  • अहीर व गडरिया द्वारा ।
  • स्त्री सिर पर सात कलश रखकर नृत्य करती है ।

3. केमाली नृत्य या साजन सजनी नृत्य

  • स्थान- बघेलखंड
  • पर्व -विवाह के अवसर पर स्त्री पुरुष दोनों केमाली गीत के साथ नृत्य करते हैं ।

4. केहरा नृत्य

  • स्थान- बघेलखंड
  • पर्व- त्योहारों पर

5. बिरहा (आहिराई) नृत्य

  • स्थान- बघेलखंड
  • पर्व- लगभग सभी जातियों द्वारा विवाह एवं दीपावली के अवसर पर किया जाता है ।

6. सुआ नृत्य

  • स्थान- बघेलखंड व छत्तीसगढ़
  • पर्व -क्वार माह में खरीफ की फसल पकने पर ।

बुंदेलखंड व बघेलखंड के लोक नृत्य

राई नृत्य

  • स्थान -बुंदेलखंड व बघेलखंड ।
  • पर्व- विवाह ,पुत्र जन्म ,खुशी के पर्व पर आदि उत्सवों में पुरुषों द्वारा स्त्री वेश धारण करके किया जाता है।
  • इसमें बीच -बीच में स्वांग का आयोजन किया जाता है।
  • इस नृत्य के केंद्र में एक नर्तकी होती है जिसे बेड़नी कहा जाता है ।
  • इसका प्रसिद्ध वाद्य यंत्र मृदंग है ।
  • बघेल खंडवा बुंदेलखंड राई में एक विशेष अंतर है बुंदेलखंड में यह खुशी के मौके पर किया जाता है व बघेलखंड में विशेषकर अहीर जनजाति द्वारा किया जाता है ।
  • राई के गीत श्रृंगार परक होते हैं।

अन्य नृत्य

 1. तेजाजी की कला

  • स्थान- गुना मालवा क्षेत्र
  • पर्व- एकादशी के दिन तेजाजी के स्थान पर एक मेला भरता है।
  • इस मेले में उनके चरित्र वह सुंदर काव्य कथाएं का वर्णन होता है घर घर जाकर कथाएं गाने की एक समृद्ध परंपरा है जो तेजाजी के शौर्य और त्याग और वीरता के किस्सों को पढ़कर सुनाते हैं।

This article is compiled by Supriya Kudraya.

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