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मध्य प्रदेश के आधुनिक कालीन साहित्यकार

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मध्य प्रदेश के आधुनिक कालीन साहित्यकार एवं उनकी रचनाएं

माखनलाल चतुर्वेदी

  • जन्म- 4 अप्रैल 1889
  • मृत्यु- 30 जनवरी 1968 – खंडवा
  • जन्म स्थान – होशंगाबाद जिले के बाबई नामक गांव में
  • हिंदी साहित्य में छायावादी आंदोलन के समांतर द्विवेदी युग की जो राष्ट्रीय काव्यधारा विकसित हुई थी उस धारा का प्रतिनिधित्व करने वाले भारतीय आत्मा के रूप में विख्यात पंडित माखनलाल चतुर्वेदी जी थे ।
  • इनकी प्रथम रचना रसिक मित्र ब्रजभाषा में भी प्रकाशित हुई थी ।
  • इन्हें 1955 में साहित्य एकेडमी अवॉर्ड व 1963 में आपको सागर विश्वविद्यालय में डायरेक्ट की उपाधि से सम्मानित किया गया।
  • प्रताप, प्रभा पत्रिका के संपादक मंडल के सदस्य एवं कर्मवीर पत्रिका के संपादक रहे
  • इन्होंने राष्ट्रीय आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई है ।व ‘पुष्प की अभिलाषा’ नामक पुस्तक इन्होंने बिलासपुर जेल में लिखी थी ।
  • राष्ट्रीय आंदोलन में भाग लिया जिसके कारण है जेल जाना पड़ा राष्ट्रप्रेम से संबंधित कविताओं के अलावा प्रेम कविताओं की भी रचना की है।
  • आपने राजभाषा बिल के विरोध में पद्मभूषण अलंकार वापस कर दिया।
    रचनाएं
  • चतुर्वेदी जी एक कवि गीतकार एवं निबंधकार के रूप में जाने जाते हैं लेकिन उनकी ख्याति कवि के रूप में अधिक है ।
  • रचनाएं

  • काव्य – हिमकिरीटनी 1942, हिम तरंगिणी 1949, माता 1952, समर्पण, युग चरण, वेणु लोग गूंजे धारा
  • कहानी – कला का अनुवाद, कहानी-कहास और कहावत (हास्य प्रधान)
  • नाटक – कृष्णा अर्जुन युद्ध 1918,
  • निबंध – साहित्य देवता 1918, अमीर-इरादे गरीब-इरादे 1960, पाँव-पाँव
  • संस्मरण तथा निबंध – समय के पाँव 1962
  • भाषण संग्रह – चिंतक की लाचारी 1965, आत्म दीक्षा
  • अन्य कृतियां – शिशुपल वध, कला अनुग्रह, पुष्प की अभिलाषा
  • इनकी कविताएं एक प्रणयलोक की सृष्टि करती हुई रहस्यमय लोक के दर्शन करती हैं साहित्य देवता की गणना संसार की सबसे साथ-साथ कृतियों में की जाती है इनके विचार मूल रूप से राष्ट्रप्रेम और देश-भक्ति से ओतप्रोत रहे हैं।
  • इनकी राष्ट्रीय कविता पुष्प की अभिलाषा अत्यधिक प्रसिद्ध हुई है।
  • मध्य प्रदेश सरकार द्वारा प्रतिवर्ष माखनलाल चतुर्वेदी पुरस्कार दिया जाता है।

सुभद्रा कुमारी चौहान

  • जन्म -16 अगस्त 1904
  • जन्म स्थान -इलाहाबाद के निहालपुर ग्राम में
  • मृत्यु 1948 बसंत पंचमी के दिन एक सड़क दुर्घटना में
  • झांसी की रानी कविता उनकी लोकप्रियता स्मरणीय और गौरवशाली रही है व वीरों का कैसा होगा बसंत जैसी कवितायो ने भारतीय जनमानस को आजादी का दीवाना बना देने की प्रखर प्रेरणा का कार्य किया है।
  • बचपन से ही अपना साहित्य के प्रति अधिक रुझान था।
  • खंडवा के ठाकुर लक्ष्मण सिंह चौहान के साथ इनका विवाह विवाह हुआ ।
  • गांधी आंदोलन के प्रभाव से आपने राष्ट्रप्रेम संबंधी कविताएं लिखी राष्ट्रीय आंदोलन में भाग लेने के कारण जेल यात्राएं भी की।
  • यह मध्य प्रदेश असेंबली की सदस्य भी थी। अपनी रचनाओं पर दो बार इन्हें सक्सेस ईयर पुरस्कार भी प्राप्त हुआ है।
  • रचनाएं
    कहानियां – बिखरते मोती, उन्मादनी, सीधे-साधे चित्र
    बाल कविता – सभा के खेल विवेचनात्मक गल्पबिहार
    काव्य संग्रह – जलियांवाला बाग में बसंत, झांसी की रानी
  • कवयित्री की भाषा सरल, सुबोध, स्पष्ट और भावना कूल है ।
  • भाषा में उच्च स्तरीय तत्सम शब्दों का प्रयोग किया है व श्रंगार, वीर, शांत रस और वात्सल्य रस का भी प्रयोग किया है।

गजानन माधव मुक्तिबोध

  • जन्म- 14 नवंबर 1917
  • जन्म स्थान -मुरैना जनपद के श्योपुरकला
  • मृत्यु- 11 सितंबर 1964
  • यह छायावदोत्तर हिंदी कविता को सर्वथा नवीन दिशा की ओर ले जाने वाले साम्यवादी विचारधारा को मानने वाले गजानन मुक्तिबोध की ख्याति प्रगतिवादी कवि के रूप में की जाती है ।
  • रचनाएं

    काव्य संग्रह – चांद का मुंह टेढ़ा, भूरी-भूरी खाक धूल
    कहानी संग्रह – काठ का सपना सतह में उठता आदमी
    साहित्यलोचना – कामायनी एक पुनर्विचार, नई कविता का आत्मसंघर्ष, नए साहित्य का सौंदर्यशास्त्र साप्ताहिक डायरी
    पुस्तक समीक्षा – उर्वशी:दर्शन और काव्य
    उपन्यास -विपात्र
    अन्य रचनाएं – तार सप्तक, अंधेरे में ब्रह्मराक्षस, भारतीय इतिहास और संस्कृति

  • मुक्तिबोध की आस्था मार्क्सवादी जीवन दर्शन पर आधारित रही है क्रांतिकारी कवियों में निराला के बाद साहित्य में गजानन मुक्तिबोध का ही स्थान है।

बालकृष्ण शर्मा ‘नवीन’

  • जन्म- 8 दिसंबर 1857
  • जन्म स्थान- शाजापुर
  • मृत्यु -29 अप्रैल 1960
  • बालकृष्ण शर्मा नवीन हिंदी की प्रगतिशील, सांस्कृतिक, स्वच्छंदवादी धारा के कवि हैं।
  • उन्होंने प्रतिभा और प्रताप के संपादक के रूप में भी कार्य किया •इन्होंने राष्ट्रीयता को संकुचित दृष्टि से ना देखकर मानवतावादी दृष्टि से लिया है। इसलिए वह गरीबों से क्रांति का उद्घोष करते हुए लिखते हैं-
    चकनाचूर करो जग को,ब्रह्मांड नाश के स्वर से,
    रूद्र गीत की क्रुद्ध तान है ,निकली मेरे अंतरतर से ।
  • भारत में आप 1952 से 1957 तक लोकसभा के तथा 1957 से मृत्यु पर्यंत 1960 तक राज्यसभा के सदस्य के रूप में रहे हैं।
  • रचनाएं

    महाकाव्य – उर्मिला-1957
    खंडकाव्य -प्राणापर्ण 1962

  • कविता संग्रह– कुकंम, क्वासि, रश्मिरेखा, अपलक
    अन्य रचनाएं – प्रलयंकर,मृत्युधाम,यौवन मदिरा,अनल गायन,नवीन दोहाबली,विनोबा स्तवन,हम विषव्यापी जन्म के
  • चर्चित कहानी ‘संत’ जनवरी 1918 मेंसरस्वती छपी थी।
  • उत्कृष्ट गीत प्रबंधन प के लिए प्रतिवर्ष मध्य प्रदेश सरकार द्वारा बालकृष्ण शर्मा नवीन पुरस्कार दिया जाता है ।

भवानी प्रसाद मिश्र

  • जन्म -23 मार्च 1914
  • जन्म स्थान -खिरिया ग्राम जिला होशंगाबाद
  • मृत्यु -1985
  • भवानी प्रसाद मिश्र की गणना प्रयोगवादी कवि के रूप में की जाती है।
  • यह बचपन से वर्धा आश्रम में गांधी जी के सानिध्य में रहे जिसके स्वाभाविक रूप से आप गांधी दर्शन से प्रभावित हुए। 1942 में राष्ट्रीय आंदोलन में सक्रिय होने के कारण कारावास भोगना पड़ा।
  • सेवाग्राम से निकलने वाली पत्रिका ‘महिला आश्रम ‘के अलावा ‘कल्पना’ का भी संपादन किया ।
  • बुनी हुई रस्सी पर आपको साहित्य अकादमी पुरस्कार से नवाजा गया।
  • 1983 मध्य प्रदेश सरकार ने शिखर सम्मान सेवा भारत सरकार द्वारा पद्मश्री तथा तुलसी सम्मान एवं गालिब पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया ।
  • रचनाएं
    काव्य संग्रह – परिवर्तन जिए, अनाम तुम आते हो, गीत फरोश, अंधेरी कविताएं, बुनी हुई रस्सी, त्रिकाल संध्या, इदम्र न मम्र
  • खंडकाव्य – कालजई
  • महाकाव्य -गांधी पंचशती, तुर्कों का खेल (बच्चों के लिए ), जिन्होंने मुझे रचा (संस्मरण),कुछ नीति ,कुछ राजनीति (निबंध) अन्य रचनाएं – गौरव ग्राम से, इसे जगाओ, गीता फरोश, दरिंदा, महारथी, सतपुड़ा के जंगल, सुबह हो गई, चार कौवे ऊर्फचार हौवे, निरापद,कोई नहीं,  मैं जो हूं, ऐसा भी होगा, धरती का पहला प्रेमी, श्रम की महिमा, अब के,  वाणी की दीनता,  बूंदे टपकी नभ से
  • संकलन – वर्षा मंगल- बूंद टपकी नभ से गुच्छे भर अमलतस-मैं क्या करूंगा
  • भवानी प्रसाद मिश्र हिंदी के उन कवियों में से हैं जिनमें प्राचीनता की प्रति मोह अपशिष्ट है येकिसी वाद या वर्ग कवि न होकर देशी काव्य परंपरा के कवि हैं।

हरिशंकर परसाई

  • जन्म -12 अगस्त 1942
  • जन्म स्थान- जमानी ग्राम होशंगाबाद
  • मृत्यु- 10 अगस्त 1985
  • हिंदी के प्रख्यात व्यंगकार साहित्यकार के रूप में जाने जाते हैं।
  • इन्होंने जबलपुर से वसुधा पत्रिका निकाली इन्होंने प्रहरी पत्रिका का संपादन किया ।
  • मध्य प्रदेश सरकार द्वारा साहित्य अकादमी पुरस्कार मध्य प्रदेश सरकार शिखर सम्मान मध्य प्रदेश हिंदी साहित्य सम्मेलन का भवभूति अलंकरण इन्हें प्रदान किया गया।
  • जबलपुर विश्वविद्यालय के मंदिर डीएनए मानद डी लिट् प्रदान किया गया।
  • इन्हें पद्मश्री से भी सम्मानित किया गया।
    रचनाएं
  • इनकी रचनाएं व्यक्तित्व बहुमुखी रही हैं परसाई जी का संपूर्ण साहित्य परसाई ग्रंथावली के खंडों में प्रकाशित हुआ है और रचनाएं निम्नलिखित हैं।
    उपन्यास – रानी नागफनी की कहानी, तट की खोज
    निबंध संग्रह – तब की बात और थी, भूत के पांव पीछे, बेईमानी की परत, पगडंडियों का जमाना, सदाचार का ताबीज ,शिकायत मुझे भी है।
    कहानी संग्रह -हंसते हैं रोते हैं, जैसे उनके दिन फिरे
    व्यंग्य निबंध संग्रह -वैष्णव की फिसलन, बोलती रेखाएं, ठिठुरता हुआ गणतंत्र ,तीन सयाने, विकलांग श्रद्धा का दौर
    अन्य महत्वपूर्ण कृतियां – आवारा भीड़ के खतरे ,तुलसीदास चंदन घिसे, निठल्ले की डायरी ,एक लड़की पांच दीवाने आदि
  • परसाई जी विकसित करके व्यंग्यकार थे।
  • परसाई जी हिंदी साहित्य के पहले रचनाकार जिन्होंने व्यंग और विधा का दर्जा दिलाया ।

शरद जोशी

  • जन्म 23 मई 1971
  • जन्म स्थान -उज्जैन
  • मृत्यु- 1991
  • समाज सुधार करने का उपकरण मानने और इस रूप में प्रयोग करने वाले शरद जोशी ने व्यंग्य को नई दिशा और ऊर्जा प्रदान की है।
  • मध्यप्रदेश शासन ने शरद जोशी सम्मान प्रारंभ करके उनका अभिनंदन किया है।
  • रचनाएं
  • जोशी जी की रचनाएं काफी व्यापक हैं
    परिक्रमा, फिर किसी बहाने, जीप पर सवार इल्लियां ,रहा किनारे बैठे, दूसरी सतह, तिलिस्म( कहानी संग्रह), राह किनारे बैठ, पिछले दिनों, अंधों का हाथी, एक था गधा
  • देश-विदेश में अपने लेख छपते और मंचों पर पढ़े जाते हैं जापान में आपके नाटकों का जापानी भाषा में मंचन हुआ है।

मूल्ला रामूजी

  • जन्म -21 मई 1896
  • स्थान जन्म -स्थान भोपाल
  • सुपुर्द ख़ाक-10 जनवरी 1952
  • आपकी ख्याति गुलाबी उर्दू जनक की के रूप में जानी जाती हैं।
  • 1921 में की पहली किताब गुलाबी उर्दू प्रकाशित हुई रचना है ।
  • रचनाएँ
    इन्तिखाबे -गुलाबी उर्दू, मजनमुआ गुलाबी, उर्दू, मीकालात गुलाबी उर्दू, खवातीन सवाने मूल्ला रामूजी, अंगुरा शादी, औरत जात, लाठी और भैंस, मुसाफिरखाना, सुबह की लताफत, मजामीन मूल्ला रामूजी, खातूते मूल्ला रामूजी, दीवाने मूल्ला रामूजी, शिफाखाना, जिंदगी, गुलाबी उर्दू, गुलाबी शायरी जेग, तारीख
  • मध्य प्रदेश सरकार ने संस्कृति भवन का नाम मूलाराम जी संस्कृत भवन के नाम पर रखकर न केवल मध्यप्रदेश बल्कि भारत के उर्दू साहित्य को सम्मानित किया है।

शिवमंगल सिंह ‘सुमन’

  • जन्म- 14 अगस्त 1915
  • जन्म स्थान -उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले
  • सुमन जी अपने विद्यार्थी जीवन से ही कविता लिखा करते थे।
  • 1936 में इनका कविता संग्रह हिल्लोल प्रकाशित हुआ थी।
  • रचनाएं
    हिल्लोल, जीवन के गान, प्रलय सृजन, विश्वास बढ़ता ही गया, पर आंखें नहीं भरी, विध्यन हिमालय, मिट्टी की बारात, युग का मोल, विश्वास बढ़ता ही गया, मिट्टी की बारात
  • यह नई कविताएं राष्ट्रीय ओजस्वी स्वरों की प्रखरता से युक्त थे।

अन्य कालजई कृतियां
1. द्वारिका प्रसाद मिश्र- कृष्णायन
2. पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी- झलमला
3. डॉ.धनंजय शर्मा -निराला काव्य एवं व्यक्तित्व
4. दुष्यंत कुमार- साये में धूप
5. हरीभाऊ उपाध्याय -बापू के आश्रम में
6. रघुवर प्रसाद द्विवेदी -उमरा की बेटी 7चंद्रधर सिंह- रमय-रास
8. नंददुलारे वाजपेई- रीति और शैली, प्रकीर्णिका

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