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कोरोना के बाद की दुनिया

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कोरोना के बाद की दुनिया

आज पूरी दुनिया कोरोना रूपी अदृश्य दुश्मन से लड़ाई लड़ रही है देर से ही सही लेकिन हम कोरोना के खिलाफ इसे जारी लड़ाई से जरूर जीतेंगे लेकिन इसके बाद हमारी दुनिया पहले जैसी नहीं हो पाएगी। संभावित भविष्य के प्रति अनिश्चितता का माहौल है और सवाल उठ रहे हैं, कि इस लम्बे बुरे वक़्त से निकलकर जब हम निकलेंगे तो समाज में क्या क्या बदलाव देखने को मिलेंगे ? कामकाज के नए तौर तरीके कैसे होंगे? लोगों की जीवन शैली में क्या-क्या बदलाव आएंगे? इस दुनिया की अर्थव्यवस्था, रोजगार,  परिवहन व्यवस्था का नया स्वरूप क्या होगा? क्या दुनिया के देशों मेंपारस्परिक एकजुटता बढ़ेगी ? क्या स्वास्थ्य क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा, नेतृत्व के नए आयाम पैदा करेगी ? क्या अब आने वाले वक्त में वैश्वीकरण की परिभाषा बदलने वाली है? क्या वैश्वीकरण का यह वर्तमान रूप भविष्य में अपनी मूल रूप से भिन्न होगा ? आज हम सबको मिलकर यह सब जवाब मिलकर तलाशने है।

कोरोना के समय

जीवन और स्वतंत्रता का अधिकार जो प्रत्येक मनुष्य को जन्म से मिला है आज दोनों अधिकार अदृश्य दुश्मन के सामने नतमस्तक है। अचानक से बड़ी दूसरी वेव के कारण हजारो लोगो को मुलभुत स्वस्थ्य सेवाएं तक नहीं मिल पाने के कारण जान गवानी पड़ी है वही पूरा देश डर के माहौल में घर में सिमटा हुआ है,  मनोवैज्ञानिक रूप से आज निराशा का माहौल है सोशल मीडिया, अख़बार और टीवी  सब जगह नकारात्मकता ज्यादा दिख रही है हमको आवश्यकता है यह जानने की कि,

मन के हारे हार है, मन के जीते जीत

मनोवैज्ञानिक सफलता अत्यंत आवश्यक है सोशल डिस्टन्सिंग शायद ही आज से ज्यादा कभी जरूरी था आज सबको कोरोना की गाइड लाइन के अनुसार सभी को डिस्टेंसिंग का पालन करने हेतु प्रेरित करना होगा इस सामाजिक प्रयास एवं सहयोग के द्वारा ही पुनः उठकर खड़े हो पायंगे

कोरोना बीमारी के बाद सामाजिक व्यवहार में किस तरह का बदलाव देखने को मिलेगा ?

  • जीवन शैली में बदलाव

अगर हम 2021 से पीछे मुड़कर देखेंगे तो पाएंगे मेरी जीवन की कई चीजें बदल चुकी है किसी भी समाज का ढांचा तब तेजी से बदलता है समाज के लोगों की आदतों में बदलाव आता है लोगों के काम करने तरीके के बदलते हैं रोजमर्रा की दिनचर्या में भी बदलाव आता है, उनके खाने-पीने और परिवार के साथ व्यवहार में बदलाव आता हैं हालाँकि वर्तमान के अधिकतर बदलाव स्वैच्छिक कम मजबूरन अधिक है। अब सामाजिक मेल मिलाप सीमित होंगे और आने वाले समय में हम देखेंगे कि कार्य स्थलो एवं सामाजिक जगहों पर लोगों का व्यवहार बदलेगा साथ-साथ बच्चों के जीवन पर भी इसका गहरा प्रभाव पड़ेगा सार्वजनिक उद्यानों में दिखती चहल-पहल मैं अब सावधानी व सुरक्षा का अवयव भी शामिल होगा।  कोरोनावायरस के कारण सामाजिक जीवन में जो दरारें आएंगी उन्हें भरने में बहुत लंबा वक्त लगेगा

  • वर्क फ्रॉम होम का चलन

कोरोनावायरस की वैश्विक समस्याओं को देखते हुए अधिकांश कंपनियां लॉकडाउन खत्म होने के बाद भी वर्क फ्रॉम होम के लिए राजी है नए कल्चर में घर से काम करने को सहज स्वीकृति प्राप्त हो गई इसमें कर्मचारीयो को रोज ऑफिस जाने की आवश्यकता नहीं पड़ती इससे उनके समय, परिवहन खर्चे की बचत होती है, कंपनियों को भी ऑफिस सेंटर की जरूरत नहीं पड़ती जिससे बिजली, पानी का खर्च भी  कम हो जाता हैं देश विदेश में सेवा क्षेत्र की कई कंपनियां पहले से ही work-from-home की सुविधा दे रहे हैं रही है

  • स्वास्थ्य एवं स्वच्छता बनेगा प्राथमिकता

कोविड-19 महामारी के प्रसार के बाद एक बात तो तय है कि लोगों के बीच स्वास्थ्य, स्वच्छता के प्रति जागरूकता स्थापित हो गई है। लंबे समय के लिए अधिक संभावना है यह है की स्वच्छता लोगों की आदत में आ जाएगी और पूरी दुनिया के लोगों के लिए  सेनीटाइजर, मास्क व्यक्तिगत साजो सामान का हिस्सा बन जाएंग।  शुचिता सरकारों के कर्तव्यों की सूची में प्रमुखता से मूल मुद्दों में शामिल हो जाएग।  स्वच्छता से संबंधित सामाजिक आदर्शों में बदलाव निश्चित है। वर्तमान में कभी हम अगर किसी से मिलते हैं तो हाथ मिलाते हैं जयदा करीबी है तो गले मिलते हैं, मेल मिलाप का यह तरीका बदल गया है अब दूर से सप्रेम नमस्ते ही नया चलन है उम्मीद है कि आगे भी  जारी रहेगा

  • भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में जाने से परहेज

लॉकडाउन के खत्म होने के बाद भी पूरी संभावना है कि लोग अधिक भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों जाने से ठीक उसी तरह परहेज करें करेंगे जिस तरह से वह लॉकडाउन में कर रहे हैं बाजार, मॉल, सिनेमाघर, शादी में लोग जाएंगे लेकिन एक दूसरे से इतने दूरी का जरूर ख्याल रखेंगेकोविड-19 महामारी के बाद भी मनुष्य की सामाजिक क्रियाओं में बहुत लम्बा व आमूलचूल बदलाव शायद ही हो क्योकि मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है और हमेशा बना रहेगा।

  • पारिवारिक रिश्तो में मजबूती

कोविड-19 की वजह से लॉकडाउन ने पारिवारिक रिश्तो को भी मजबूत किया है, गहन उपभोक्तावादी विचारधारा एवं प्रतिस्पर्धा की माहौल ने परिवारिक ढांचे को कमजोर कर दिया था इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि सभी के परिवार आज नजदीक आए है, लोकडाउन की वजह से लोगों को साथ वक्त बिताने का मौका मिला इसके सुखद परिणाम भविष्य में लिखेंगे। लोकडाउन खत्म होने के बाद भी पारिवारिक  रिश्तो में मजबूती सामाजिक स्तर पर अच्छा संकेत है

वैश्विक अर्थव्यवस्था पर कोरोना वायरस का प्रभाव

  1. कोरोना महामारी और वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं पर इसके प्रभाव के अध्ययन ने यह बात स्पष्ट है, कि इस बीमारी ने सभी देशों की अर्थव्यवस्थाओं को प्रभावित किया है तथा आज भारत की अर्थव्यवस्था भी इससे प्रभावित हो रही है।
  2. सबसे सशक्त अमेरिकी बाज़ार में वर्ष 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के बाद सबसे खराब अनुभव हाल में कोरोना वायरस के कारण देखा किया गया इस वर्ष अमेरिकी बाज़ार में 12% से अधिक की गिरावट देखि गयी है।
  3. आईएलओ (International Labour Organization)के अनुसार कोरोना वायरस की वजह से दुनियाभर में 2|5 करोड़ नौकरियां ख़तरे में हैं
  4. COVID-19 के कारण चीन से होने वाले आयात के प्रभावित होने से स्थानीय और बाहरी आपूर्ति श्रृंखला के प्रभावित होने से भी चिंताएँ बढ़ी हैं
  5. UNCTAD (United Nations Conference on Trade and Development) विश्लेषण के अनुसार, कमोडिटी से भरपूर निर्यातक देशों को अगले दो वर्षों में विदेशों से निवेश में $ 2 – 3 ट्रिलियन की कमी का सामना करना पड़ सकता है

विषाणु जनित यह संकट किसी भी अन्य  वित्तीय संकट से बिलकुल अलग है। अन्य वित्तीय संकटों का निदान समय-परीक्षणित उपायों (Time-tested Measures) जैसे- बेल-आउट पैकेज (विशेष वित्तीय प्रोत्साहन), दर में कटौती आदि से किया जा सकता है, परंतु विषाणु जनित संकट का समाधान इन वित्तीय उपायों द्वारा किया जाना बहुत मुश्किल है

भारत सरकार को लगातार विकास की गति का अवलोकन करने की आवश्यकता है, साथ ही साथ चीन पर निर्भर भारतीय उद्योगों को आवश्यक समर्थन एवं सहायता प्रदान करनी चाहिये। कोरोना वायरस जैसी महामारी की पहचान, प्रभाव, प्रसार एवं रोकथाम पर चर्चा अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों द्वारा की जानी चाहिये ताकि इस बीमारी पर नियंत्रण पाया जा सके।

भारत को भी चाहिए कि आर्थिकी को संभालने के लिए भारत मे भी प्रतिभाशाली अर्थशास्त्रियों की एक कमेटी का गठन किया जाए, जिसमें प्रोफेशनल हों और वे भारतीय चुनौतियों के अनुसार देश की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए चरणबद्ध तरीके से नीतिगत समाधान सरकार के सामने रखें

तकनीकी पर निर्भरता में वृद्धि

  • डिजिटल अधोसंरचना का विकास जमीनी स्तर तक पहुंचना आवश्यक हो गया है,घर पर बैठकर काम करने के प्रचलन के कारण तकनीकी आधारित सेवाएं ही रोजगार का अवसर उपलब्ध करेंगी जिसके कारण तकनीकी पर निर्भरता में वृद्धि होगी
  • कोरोनावायरस के इलाज के लिए सुरक्षित दवाई/ Vaccine का विकास करने में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस देसी उच्च स्तरीय तकनीकी आवश्यक होगी ताकि जल्द ही इस पर काबू पाया जा सके यह तकनीकी प्रयासों का पूरक बन सकती है,औषधी विकास एक अत्यंत जटिल एवं लंबी प्रक्रिया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से अनुसंधान के प्रयासों को जल्द ही पूर्ण किया जा सकता है
  • टेलीमेडिसिन का विकास होने से अस्पतालों में लगी भीड़, स्वास्थ्य केंद्रों की अत्यंत महंगे होने की समस्या का समाधान कर सकती है,कई चिकित्सक सलाह दे रहे  है कि वह वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हेल्थ केयर सेंटर जाने के बजाय रिमोट केयर की मदद से स्वस्थ्य सेवा प्रदान की जा।  वर्तमान परिस्थितियों जहाँ सोशल डिस्टेंसिंग अत्यंत आवश्यक हो गई है टेलीमेडिसिन ही भविष्य का सुरक्षित विकल्प होगा
  • घर में काम करने की प्रवृत्ति बढ़ने से खुदरा खरीदारी अधिक से अधिक ऑनलाइन होगी| आमने सामने की बातचीत कम होगी प्रतिस्पर्धी दामों पर ऑनलाइन शॉपिंग की प्रवृत्ति का विकास होगा

 

शिक्षा के क्षेत्र में कोविड का वैश्विक प्रभाव

दुनियाभर में कोरोना ने लाखों लोगों की शिक्षित होने के तरीके में परिवर्तन कर दिया है,40 से अधिक देशों में लम्बे लोकडॉन के कारण स्कूल, कॉलेज बंद हो गया प्रत्यक्ष रूप से 450 मिलियन से अधिक बच्चे प्रभावित हुए हैं इसके अलावा 25 से अधिक देशों में स्थानीय संकट पर काबू पाने के उद्देश्य से अस्थाई तौर पर होमस्कूलिंग की परिस्थितियां उत्पन्न हुई है खास तौर पर चीन, दक्षिण कोरिया, ईरान और भारत जैसे देश सबसे अधिक प्रभावित इसलिए यह होम स्कूलिंग सिस्टम शिक्षा नवाचार का एक नया उदाहरण होगा इसके अलावा इंटरएक्टिव एप, ऑनलाइन शिक्षा का चलन बड़ा है

महामारी द्वारा जनित इस अप्रत्याशित समस्या ने छात्रों के जीवन पर गहरा प्रभाव डाला है, जिसे रचनात्मकता से ही हल किया जाना चाहिए ताकि बदलते परिवेश हेतु आवश्यक कौशल और शिक्षा प्रदान किया जा सके| भारत के शिक्षा प्रणाली में कई समस्याएं है नयी शिक्षा नीति 2020लागू होने के पूर्व ही हम इस संकट में फस गए। छात्र अपनी नियमित दिनचर्या का पालन करने में असमर्थ है वर्चुअल माध्यम अभी उतने सशक्त और इंटरैक्टिव नहीं है कि फिजिकल शिक्षा का स्थान ले सके। यह छात्रों के लिए भी अपनी प्रणाली में परिवर्तन का समय है ताकि गुणवत्ता में कोई कमी न आये  और लाभकारी उपायों को अपनाया जाये

वैश्वीकरण बनाम संरक्षणवाद

मूडीज इन्वेस्टर्स सर्विस ने कहा कि वैश्विक महामारी के कारण व्यापार, निवेश (निवेश) और टेक्नॉलॉजी ट्रांसफर (टेक्नोलॉजी ट्रांसफर) पर अंकुश की धारणा बढ़ने से वैश्विक इकोनमी में संरक्षणवाद बढ़ा है

संरक्षणवाद (Protectionism) आर्थिक नीति है, जिसका अर्थ है विभिन्न देशों के बीच व्यापार पर अवरोध लगाना। यह व्यापार प्रतिबन्ध विभिन्न प्रकार से लगाये जा सकते है जैसे :- आयातित वस्तुओं पर शुल्क लगाना, प्रतिबंधक आरक्षण और अन्य बहुत से सरकारी प्रतिबंधक नियम जिनका उद्देश्य आयात को कम करना और विदेशी कंपनियो  द्वारा स्थानीय बाजारों के अधिग्रहण को रोकना है।

वैश्विक महामारी (महामारी) की वजह से तमाम देशों के बीच व्यापारिक संबंध और आपूर्ति श्रृंखला में कुछ बुनियादी बदलाव आए हैं, अब देशों में आत्मनिर्भरता की प्रवृत्ति जोर पकड़ने लगी है और आंतरिक व्यापर आधारित  अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करने के प्रयास किये जा रहे है । इससे अमेरिका द्वारा प्रवर्तित भूमंडलीकरण प्रक्रिया को आघात पहुंचना तय है

अब समय कि मांग हैAEIOU सिद्धांत

A-Adaptability

E- Efficiency

I-Inclusivity

O- Opportunity

U- Universalism

कोरोना के साथ भविष्य के राह

परिवर्तन प्रकृति का नियम है, और विकास का सूचक है कोरोनावायरस निकट भविष्य में खत्म होने वाली चीजें नहीं है, अब यह एक लम्बे वक़्त तक दुनिया का स्थाई अंग बनकर रहेगा स्थानीय लोकडाउन, सोशल डिस्टेंसिंग, मास्क , सैनिटाइज़र ये अब समाज का हिस्सा बने रहेंगे लोकडाउन के बाद कोरोना से जंग जीतने की एक ही तरीका है अब हमें कोरोना के साथ जीना सीखना होगा इसके साथ जीने का सफल मंत्र है कि हमे इससे डरना नहीं  है इसका संक्रामक होना ही सबसे बड़ी समस्या है, जिसके लिए सामाजिक चेतना का विकास करना होगा,  देश में चल रही वैक्सीन ड्राइव को सफल बनाने के लिए भी सकारात्मक सहयोग आवश्यक होगा आपसी सहयोग और उचित चिकित्सीय निदान के द्वारा ही हम इस अदृश्य शत्रु पर विजय पा सकते  हैं

 यह लेख आशीष सिंह राजपूत द्वारा लिखित है।
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