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अकबर के नवरत्न

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अकबर के नवरत्न

1. बीरबल

  • नवरत्नों में सबसे बुद्धिमान बीरबल को माना जाता था।
  • जन्म -1528 ईसवी
  • जन्म स्थान- कालपी( जालौन)
  • बीरबल का जन्म एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था ।
  • बीरबल के बचपन का नाम महेशदास था ।
  • बीरबल को अकबर के दरबार पहुंचाने का श्रेय आमेर के राजा भारमल के पुत्र भगवानदास को है इनकी योग्यता का सम्मान करते हुए सम्राट ने उन्हें कबीराज व राजा की उपाधि के साथ-साथ 2000 मनसब प्रदान किए थे।
  • बीरबल सैनिक भी थे अकबर ने उन्हें नगरकोट, कांगड़ा, कालिंजर जागीर भी प्रदान की थी ।
  • 1583 इसमें अकबर के न्याय विभाग के सर्वोच्च अधिकारी बने।
  • अकबर द्वारा 1582 में चलाए गए दीन ए इलाही धर्म को स्वीकार करने वाले एकमात्र हिंदू राजा बीरबल ही थे।
  • 1586 ईस्वी में यूसुफजई कबीले से लड़ते हुए इनकी मृत्यु हो गई थी।
  • अकबर ने इन्हें कविराज की संज्ञा दी थी ।

2. अबुल फजल

  • सूफी शेख मुबारक के पुत्र थे ।
  • जन्म- 1550 ईस्वी
  • जन्म स्थान -आगरा
  • यह अपनी योग्यता के कारण सम्राट के संपर्क में आए यह इतिहास दर्शन एवं साहित्य के विद्वान थे ।
  • इन्होंने अकबरनामा व आईने अकबरी जैसी ग्रंथों की रचना की हैं।
  • अबुल फजल दीन ए इलाही धर्म के मुख्य पुरोहित थे ।
  • इन्हें दक्षिण भारत में कई युद्धों का सफल संचालन भी किया।
  • 1602 ईस्वी में इनकी हत्या शहजादा सलीम ने करा दी जब वे दक्षिण से आगरा की ओर आ रहे थे।

3. तानसेन

  • मिर्जा तानसेन का जन्म- ग्वालियर (मध्य प्रदेश )
  • मूल नाम- रामतनु पांडे
  • वृंदावन के संत हरिदास के शिष्य थे।
  • यह संगीत कला में अत्यधिक निपुण थे, इनके संगीत की प्रशंसा सुनकर सम्राट अकबर ने इन्हें अपने दरबार में बुलवा लिया तानसेन को संगीत का सम्राट भी कहा जाता है।
  • इन्हें कण्ठाभरणवाणी विलास की उपाधि से सम्मानित किया।
  • इन्होंने कई नए रागों की रचना की यह है व ध्रुपद गायन शैली का विकास किया।
  • इनकी प्रमुख कृतियां मियां की तोड़ी, मियां की मल्हार, मियां की सारंग दरबारी कान्हड़ा आदि है।
  • ऐसा माना जाता है कि मोहब्बत गौस की प्रेरणा से उन्होंने इस्लाम धर्म ग्रहण किया था ।
  • इनकी मृत्यु -1589

4. अब्दुल रहीम खानखाना

  • यह बैरम खां के पुत्र थे ।
  • ऐसा माना जाता है कि इनका पालन-पोषण अकबर किया था।
  • यह उच्च कोटि के कवि थे इन्होंने तुर्की में लिखे बाबरनामा का फारसी अनुवाद किया था।
  • हिंदी में उन्होंने अनेक दोहे लिखे जो आज भी पढ़े जाते हैं, यह तुलसीदास के समकालीन थे ।
  • अकबर का पुत्र जहांगीर भी इनके व्यक्तित्व से प्रभावित था गुजरात के शासन को युद्ध में अपनी वीरता से पराजित करने पर अकबर ने हैं खानखाना की उपाधि से सम्मानित किया था।
    मानसिंह
  • ये आमेर के राजा भारमल के पुत्र तथा भगवान दास के पुत्र थे।
  • इनके परिवार से अकबर के साम्राज्य विस्तार में मुख्य सेनापति की भूमिका निभाई ।
  • इनके परिवार से अकबर का वैवाहिक संबंध स्थापित हुआ जिससे अकबर ने हिंदुओं से उदारता का व्यवहार करते हुए जजिया कर समाप्त कर दिया ।
  • महाराणा प्रताप के विरुद्ध अकबर की विजय मानसिंह नहीं दिलाई थी।
  • सम्राट अकबर की ओर से इन्होंने काबुल ,बंगाल तथा बिहार प्रदेशो आदि सफल सैनिक अभियान चलाए।
  • इनकी मृत्यु -1611 ईस्वी में हुई ।

6. राजा टोडरमल

  • जन्म-अवध के सीतापुर जिले में तहसील लहरपुर
  • यहां आने से पूर्व ये शेरशाह सूरी के यहां नौकरी करते थे।
  • 1562 ईस्वी में अकबर की सेना में भर्ती हुए ।
  • 1572 ईस्वी में गुजरात का दीवान बनाया गया।
  • इनकी प्रसिद्धि का मुख्य कारण इनके द्वारा किए गए भूमि सुधार थे।
  • दीवाने -ए-अशरफ के पद पर रहकर भूमि सुधार की सफल योजना चलाई।
  • इनके नाम पर हरदोई जिले में राजा टोडरमल भूलेख प्रशिक्षण संस्थान का नामकरण किया गया है।
  • यह अपने धर्म के कट्टर समर्थक थे इसलिए इन्होंने दीन ए इलाही धर्म अस्वीकार कर दिया।
  • राजा टोडरमल ने वित्त पोषण के साथ वाराणसी स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर (शिव मंदिर) का पुनर्निर्माण करवाया था
  • इनकी मृत्यु -1589 ईस्वी में हुई।

7. शेख फैजी

  • जन्म -1547 ईस्वी
  • जन्म स्थान- आगरा
  • अबुल फजल के बड़े भाई थे उच्च कोटि के कवि व लेखक थे।
  • सम्राट अकबर ने इन्हें राजकवि के पद पर आसीन किया था।
  • इन्होंने महाभारत व भगवत गीता का फारसी अनुवाद किया।
  • अकबरनामा नामक ग्रंथ की रचना की।
  • यह दीन ए इलाही धर्म के कट्टर समर्थक थे।
  • गणित की पुस्तक लीलावती का फारसी में अनुवाद किया।
  • इनकी मृत्यु 1595 ईस्वी में हुई।

8. हकीम हुमाम

  • यह अकबर के विश्वासपात्र मित्र थे।
  • अकबर के रसोईघर का प्रबंधन करना इनकी जिम्मेदारी थी।
  • कहीं-कहीं पर फकीर अजीमुद्दीन को भी नवरत्न बताया गया है ।

9. मुल्ला-दो-प्याजा

  • यह अरब के रहने वाले थे और इन्हें भोजन में दो प्याज बहुत पसंद थे इसलिए अकबर ने इनका नाम मुल्ला दो प्याजा रखा था ।
  • इनकी बुद्धिमानी व वाकपटुता के कारण इन्हें नवरत्नों में रखा गया था।

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